एमपी डिंडोरी पीएम मोदी आवास योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर घास-फूस की छत वाले घर बना दिए।
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश में भोले-भाले आदिवासियों के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर धोखा हुआ है। योजना के तहत आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में खप्पर व घास-फूस के मकान बनाए जाने का मामला सामने आया है। जांच के बाद संबंधित अधिकारियों को तो बचा लिया, ग्राम सचिव और रोजगार सहायक पर गाज गिरी है। इस मामले में कलेक्टर ने शिकायतों के बाद जांच कराई तो जांच में सिर्फ एक मकान में गड़बड़ी पाई है। हकीकत तो यह है कि सिर्फ एक-दो मकान ही मानकों के अनुरूप बने हैं। ग्रामीणों ने ग्राम सचिव से अधिकारियों तक को रिश्वत देने के आरोप लगाए हैं। कुछ घरों में तो दरवाजे तक नहीं लगे हैं।
एमपी डिंडोरी पीएम मोदी आवास योजना: पीएम आवास योजना के नाम कच्चे मकान बना दिए गए।
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डिंडौरी जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य गौरा कन्हारी गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर कच्चे व झोपड़ीनुमा मकान बना दिए थे। इन मकानों में छत के नाम पर बल्लियों के सहारे खप्पर या घास-फूस बिछाई गई है। मकानों में सीमेंट-कांक्रीट की जगह पर मिट्टी का उपयोग किया गया है। हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि पीएम आवास योजना के नाम पर सरपंच, पंचायत सचिव, वन विभाग के कर्मचारी व रोजगार सहायक ने अधिकारियों के नाम पर मोटी रकम बतौर रिश्वत के रूप में ली थी। अधिकारियों को खुश करने के लिए हितग्राही के घर में पले मुर्गी भी ले गए थे। छोटेलाल बैगा ने बताया कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर सरपंच को 5 हजार, ग्राम सचिव ने 5 हजार, रोजगार सहायक ने 3 हजार, फॉरेस्ट विभाग के कर्मचारी ने 1 हजार एवं पंचायत के एक कर्मचारी को 1 हजार रुपये की रिश्वत देनी पड़ी थी। अधिकारियों को खुश करने के नाम पर पंचायत सचिव एक मुर्गा भी साथ ले गए थे।
ग्राम सरपंच ललिया बाई के पति बुध सिंह ने बताया कि वह और उसका भाई आवास योजना के हितग्राहियों में शामिल है। योजना के तहत बने उनके मकान में भी छत के नाम पर खप्पर लगे हैं। उनके भाई प्रेम सिंह के आवास को बिना नींव के खड़ा कर दिया गया। दीवार में सीमेंट-कांक्रीट की जगह लाल मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। छत के नाम पर खप्पर बिछा दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी दूसरे के पक्के मकानों की फोटो जियो टैग कर आवास योजना के तहत बने कच्चे मकानों की किश्तें जारी की गई थी। उसके भाई से सचिव ने 30 हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिए थे। व्यापक स्तर पर हुए भ्रष्टाचार के बावजूद संबंधित अधिकारी जांच में बच गए।
एमपी डिंडोरी पीएम मोदी आवास योजना: ग्राम सचिव को जांच के बाद सस्पेंड कर दिया गया।
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रोजगार सहायक और ग्राम सचिव पर कार्रवाई
जांच के नाम पर लीपापोती हुई और ग्राम सचिव गेंदसिंह परस्ते पर कार्रवाई की गई। रोजगार सहायक को भी निलंबित किया गया है। संबंधित जिम्मेदारी अधिकारी सिर्फ आंख मूंदकर भ्रष्टाचार देखते रहे। वह दोषी नहीं पाए गए। हालांकि, डिंडौरी के कलेक्टर रत्नाकर झा ने बताया कि मामला सामने आते ही जांच कमेटी बनाई गई थी। जांच में दोषी पाए गए ग्राम रोजगार सहायक तथा ग्राम सचिव को हटाया है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। रिपोर्ट में वन विभाग के कर्मचारियों सहित अन्य किसी संबंधित अधिकारियों के दोषी होने की बात नहीं आई है।