मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस का संक्रमण जुलाई के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने विश्लेषण के आधार पर चेतावनी दी है कि रोग के व्यापक भौगोलिक प्रसार और परीक्षण में कमी के बावजूद सक्रिय मामलों में हुई वृद्धि से यह साबित हो रहा है कि वायरस अभी भी मौजूद है। फिलहाल इसके वैक्सीन की कोई संभावना नहीं है। 27 मई तक के उपलब्ध आंकड़ों पर किए गए विश्लेषण के अनुसार संभावना जताई जा रही है कि राज्य में कोरोना संक्रमण जुलाई के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है।
विश्लेषण में कहा गया है कि आधी मई के बाद राज्य में कोरोना के मामले में दैनिक उछाल आया। वायरस के प्रसार में वृद्धि हुई और सक्रिय मामले फिर से बढ़ने लगे। इसके अलावा, पिछले तीन हफ्तों में पॉजिटिव मामले के दर में वृद्धि हुई है। 12 जिलों में पांच प्रतिशत के दर से पॉजिटिव मामले में वृद्धि दर्ज की गई है। विश्लेषण में कहा गया है कि मृत्यु दर कम हो रही थी, लेकिन पिछले 10 दिनों में मृत्यु की वृद्धि दर फिर से बढ़ने लगी है। 15 मई को यह दर 2.1 प्रतिशत थी और 27 मई को यह बढ़कर 2.4 प्रतिशत हो गई।
विश्लेषण मे बताया गया कि मई में भी मामलों की संख्या में वृद्धि जारी रही, जबकी परीक्षण की दर कम हो गई। अधिकारियों ने कहा कि एक मई को 2,461 परीक्षण किए गए थे। वे 16 मई को 5,648 हो गए, लेकिन 27 मई को यह घटकर 3,595 हो गए। विश्लेषण के बाद, 28 मई को 4,840 परीक्षण किए गए और सात जून को 6,126 परीक्षण किए गए।
स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि राज्य कोविड-19 के मरीजों की रिकवरी रेट देश में सबसे बेहतर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 65 प्रतिशत की दर से राज्य में मरीज ठीक हो रहे हैं, साथ ही उन्होंने कहा कि हमने 80,000 बेड की तैयारी की है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अमूल्य निधि ने कहा कि राज्य को परीक्षण में काफी वृद्धि की आवश्यकता है। इसके बजाय परीक्षणों की संख्या घट रही है, अगर सरकार अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत नहीं करती है तो स्थिति और खराब हो जाएगी।