कर्जमाफी के वादे ने कांग्रेस की मध्यप्रदश में वापसी तो करा दी मगर अब यह वादा नवनियुक्त मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। जानकारों के मुताबिक प्रदेश पहले से ही 1,60,871.9 करोड़ रुपये के कर्ज में है, ऐसे में किसानों की कर्जमाफी का प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।
सरकार गठन से पहले ही प्रशासनिक स्तर पर कर्जमाफी की कवायद शुरू हो गई है। मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर कर्जमाफी का ब्योरा मांगा गया है। किसानों पर 56 हजार करोड़ का कर्ज होने का अनुमान है। यह कर्ज सहकारी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण विकास बैंक और निजी बैंकों का है।
31 मार्च, 2018 तक किसानों का करीब 75,000 करोड़ कर्ज बकाया था। 2017-18 में 40 लाख किसानों को 46,000 करोड़ रुपये ऋण दिया गया था जिसमें 20,000 करोड़ इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ही दिए गए।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अपने वादे के मुताबिक किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ कर सकती है।
पंजाब- महाराष्ट्र मॉडल समझने टीम रवाना
मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक फैज अहमद किदवई चंडीगढ़ और एडीशनल डायरेक्टर बीएम सहारे महाराष्ट्र के लिए रवाना हुए हैं। दोनों ही अधिकारी कर्जमाफी को लेकर पंजाब और महाराष्ट्र मॉडल का अध्ययन करने गए हैं। इसके अलावा एक टीम को भी चंडीगढ़ भेजा गया है ताकि वह पंजाब सरकार के किसानों के लिए बनाए पोर्टल से जुड़ी तमाम जानकारियां इकठ्ठा कर सकें। इस पोर्टल पर आधार लिंक, अलग-अलग कैटेगरी के कर्ज के साथ डिफॉल्टर किसानों की अलग-अलग श्रेणियों की जानकारी रहती है।
ये है पंजाब-महाराष्ट्र कर्ज माफी मॉडल
पंजाब में कर्ज माफ करने की कवायद 14 महीने पहले शुरू हुई थी, अबतक केवल 20% किसानों की ही कर्ज माफी हो सकी है। जबकि महाराष्ट्र में कर्जमाफी का सिलसिला 18 महीने पहले शुरू हुआ था और अबतक केवल 60% ही लक्ष्य हासिल हो पाया है। पंजाब और कर्नाटक सरकार ने चालू कर्ज से जुड़े किसानों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी। माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस यही मॉडल अपना सकती है।
कर्ज माफी को लेकर पूर्व आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन ने कहा था कि कर्जमाफी का फायदा गरीबों को नहीं मिलता और इससे अर्थव्यवस्था असर पड़ता है।
2008 में चुनाव से पहले तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट में 60 हजार करोड़ की कर्जमाफी का वादा किया था और कुछ महीने बाद हुए आम चुनावों में कांग्रेस की जीत हुई। बता दें बीते लगभग 5 सालों में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और पुदुचेरी की सरकारों ने किसानों का कर्ज माफ किया है।