पांच आईपीएस अधिकारियों को सिलेक्शन ग्रेड का लाभ दिए जाने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
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प्रदेश कैडर के पांच आईपीएस अधिकारियों को केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने 1 जनवरी 2008 से सिलेक्शन ग्रेड का लाभ दिए जाने के आदेश पारित किए थे। जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने याचिका के डिफॉल्ट दूर करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 20 जून को निर्धारित की है।
मध्य प्रदेश कैडर 1995 के आईपीएस अधिकारी जयदीप प्रसाद, चंचल शेखर, मीनाक्षी शर्मा, योगेश देषमुख तथा वेंकटेश्वर राव की तरफ से कैट में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि 13 साल की सर्विस पूर्ण करने पर आईपीएस अधिकारी को सिलेक्शन ग्रेड दिया जाता है। उन्हें सिलेक्शन ग्रेड का लाभ 1 जनवरी 2010 में दिया गया। जबकि उन्हें सिलेक्शन ग्रेड का लाभ 1 जनवरी 2008 से मिलना चाहिए था। इस संबंध में उन्होंने सरकार को अभ्यावेदन दिया था। सरकार ने देरी के लिए कोई कारण का उल्लेखन नहीं करते हुए अभ्यावेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पद रिक्त नहीं थे।
याचिका में कहा गया था कि इसके बाद के अधिकारियों को निर्धारित समय पर सिलेक्शन ग्रेड का लाभ दिया गया। जिसके कारण जूनियर अधिकारियों का वेतन उनसे अधिक हो गया। निर्धारित समय में सिलेक्शन ग्रेड का लाभ नहीं मिलने के कारण उनकी पदोन्नति एडीजी पद पर नहीं हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश हवाला देते हुए याचिका में कहा गया था कि सरकार की गलती का नुकसान लोक सेवक को नहीं होना चाहिए। कैट ने याचिका की सुनवाई करते हुए 11 नवंबर 2020 में पारित अपने आदेश में याचिकाकर्ता आईपीएस अधिकारियों को 1 जनवरी 2008 से सिलेक्शन ग्रेड का लाभ दिए जाने के निर्देष जारी किए।
कैट के आदेश को सरकार द्वारा लगभग डेढ़ साल बाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में डिफॉल्ट होने के कारण युगलपीठ ने कॉमन ऑर्डर जारी करने के लिए उक्त आदेश जारी किए।