इंदिरा गांधी और ठाकरे से जुड़ी है यह सीट
भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए खंडवा सीट बहुत ही अहम है। इसी सीट पर भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे भी चुनाव जीत चुके हैं। वहीं एक समय कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे शिवकुमार सिंह के लिए इंदिरा गांधी यहां प्रचार के लिए आ चुकी हैं। खंडवा संसदीय सीट पर 1979 के उपचुनाव के समय इंदिरा गांधी गांव-गांव घूमी थीं। यह अलग बात है कि इसके बाद भी वे उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शिवकुमार सिंह को जीत नहीं दिला सकी थीं। सांसद परमानंद गोविंदवाला के निधन के बाद खंडवा में उपचुनाव हुए थे। इंदिरा गांधी दिल्ली से भोपाल तक प्लेन से आईं लेकिन खंडवा तक आने के लिए उन्हें हेलीकॉप्टर नहीं मिला। तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। इस वजह से वे भोपाल से होशंगाबाद तक ट्रेन से आईं। होशंगाबाद से उन्हें लेने शिवकुमार सिंह गए थे। इसके बाद खंडवा, बुरहानपुर, मांधाता के गांवों का इंदिरा ने दौरा किया। इस चुनाव में कांग्रेस के शिवकुमार को भाजपा के कुशाभाऊ ठाकरे ने हरा दिया था।
तीन विधानसभा सीटों पर भी कड़ा मुकाबला
राज्य में तीन विधानसभा क्षेत्रों रैगांव, जोबट और पृथ्वीपुर में उपचुनाव होने वाले हैं। इन दिनों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों में कड़ी टक्कर है। यही कारण है कि दोनों दलों की चुनावी जमावट तेज हो गई है। सीएम चौहान की घोषणा के पहले ही इन सभी क्षेत्रों के दौरे कर चुके हैं। वहीं भाजपा ने भी संगठन स्तर पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। जबकि कांग्रेस जनता के बीच शिवराज सरकार की नाकामी को लेकर पहुंच रही है।
जोबट विधानसभा सीट आदिवासी बहुल सीटों में से एक है। यह वर्ग लंबे समय से भाजपा से नाराज चल रहा हैं। ये सीट कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया के निधन से खाली हुई है। रैगांव इस सीट पर अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। ये सीट भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन से खाली हुई। इस सीट पर कब्जा बरकरार रखना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर है। बुंदेलखंड क्षेत्र की पृथ्वीपुर सीट पर सामान्य और पिछड़ा वर्ग का दबदबा है। कांग्रेस यहां हमेशा से ही आगे रही है। कांग्रेस विधायक और कमलनाथ सरकार में आबकारी मंत्री रहे बृजेन्द्र सिंह राठौड़ के निधन से खाली हुई है।