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सत्ता का सेमीफाइनल: रीवा की जनता के तीखे सवालों का नेताओं ने ऐसे किया सामना

Mon, 05 Nov 2018 04:59 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मध्यप्रदेश चुनाव
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मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। अमर उजाला आपको बता रहा है राज्य के जमीनी हालात और उन विषयों के बारे में जो इस बार चुनावी मुद्दे हैं। इसी के मद्देनजर अमर उजाला का चुनाव रथ पहुंचा रीवा। संवाददाता वैभव कुमार ने आम जनता और जनप्रतिनिधियों से बात करके यहां का मूड जानने की कोशिश की। 
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उन्होंने जाना कि आखिर जनता क्या चाहती है? उनके चुने हुए नेता उनकी उम्मीदों पर कितने खरे उतरे हैं? साथ ही यह भी जाना कि जनता के मन में क्या है। टी वैली प्रायोजित अमर उजाला के खास लाइव कार्यक्रम सत्ता के सेमीफाइनल में जानिए कि रीवा की जनता ने क्या कहा। 

सिरमौर से भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह ने कहा- बिजली-पानी की बात करें तो भाजपा की सरकार ने प्रदेश में एक रिकॉर्ड कायम किया है। पहली बार यहां 24 घंटे शहर और ग्रामीण में बिजली मिलने लगी है। सिरमौर में सारे गांव बिजली पहुंची है। यहां किसी भी किसान की जमीन नहीं ली गई , किसानों ने मर्जी से निजी कंपनियों को बेचा था। ये कंपनियां कोल प्लांट लगाने जा रही थी। लेकिन मनमोहन सरकार ने इसमें करप्शन किया। हमारी सरकार कई योजनाएं लाई है जो छोटे-छोटे उद्मियों को लाभ पहुंच रहा। हमने अच्छी शिक्षा देने का वादा निभाया है। 
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इस पर आज लोगों की तरफ से भी आवाज उठी। राम मनोहर गौतम ने कहा कि गांव गांव पानी पहुंच रहा है। एक अन्य ने कहा कि सरकार ने व्यापम घोटाला किया है, लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर किया है। एक युवा ने कहा कि राजेंद्र शुक्ला मंत्री हैं, क्या एक भी रीवा का युवा बीटा में काम कर रहा है, योजनाएं कागज पर हैं, काम नहीं होता। 

कांग्रेस शहर अध्यक्ष गुरमीत सिंह मंगू ने कहा- विकास की बात बहुत हुई, 15 साल से उमा भारती, बाबूलाल गौर, शिवराज चौहान ने कहा कि हम विकास करके देंगे। मन की बात कहने वाले भी बहुत कुछ कह गए, लेकिन हुआ कुछ नहीं। यहां ऊर्जा मंत्री ने किसानों की जमीन ले ली, आज तक प्रोजेक्ट नहीं लगा। वीडियोकान को जमीन दे दी गई। रोजगार देना है तो कमलनाथ जी के क्षेत्र में देख लीजिए। अगर 130 लोगों को भी रोजगार दिया होगा तो विकास पुरुष को नारियल और माला चढ़ाऊंगा। एनएच 7 में हाईवे यूपीए सरकार की देन है। 

रीवा की महापौर ने कहा-  रीवा की सड़कों का 2003 में तहसील से भी बुरा हाल था। आज पूरे शहर में सड़कों का जाल बिछा हुआ है। गांव-गांव सड़क पहुंची है, जो मार्ग मुख्य सड़कों से जुड़ गई है। 
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