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मध्यप्रदेश में नोटा ने बिगाड़ दिया भाजपा का खेल नहीं तो शिवराज फिर संभालते कमान 

Thu, 13 Dec 2018 10:36 AM IST
Sneha Baluni चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शिवराज सिंह चौहान - फोटो : ANI
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मध्यप्रदेश में भाजपा को करीबी अंतर से हार मिली। इस हार की सबसे बड़ी वजह रही नोटा। जी हां, नोटा ने ही इस बार भाजपा का खेल बिगाड़ा है। प्रदेश में इस बार एससी-एसटी एक्ट को लेकर सवर्णों में गुस्सा था। इसे लेकर भाजपा के खिलाफ नोटा अभियान भी चलाया गया और नतीजों में इसका असर भी दिख गया। नोटा को 22 विधानसभा सीटों पर जीत के अंतर से ज्यादा वोट मिले। जिसकी वजह से भाजपा के चार कद्दावर मंत्री चुनाव हार गए। भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर में सिर्फ 0.1 फीसदी का अंतर था, जिसमें भाजपा को 0.1 फीसदी मत ज्यादा मिले, लेकिन नोटा को 1.4 फीसदी मत मिले जोकि 5.4 लाख वोट थे। 
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प्रदेश में 11 ऐसी सीटें रहीं जहां भाजपा उम्मीदवार की हार का अंतर से ज्यादा वोट नोटा को पड़े। यानि भाजपा को जितने मतों से हार मिली उससे ज्यादा मत नोटा के खाते में गए। इस तरह भाजपा का खेल बिगड़ गया। भाजपा बहुमत से 7 सीटें दूर रह गई। वह 109 सीटें ही जीत सकी। अगर नोटा की हार वाली 11 सीटें भी उसके हाथ आ जाती तो आज शिवराज फिर सीएम बन जाते।  
 
क्रम विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस की जीत का अंतर नोटा वोट
1. बियाओरा 826 वोट 1481
2. दामोह 798 1299
3. गन्नौर 1984 3734
4. ग्वालियर (दक्षिण) 121 1550
5. जबलपुर (उत्तर) 578 1209
6. जोबाट 2056 5139
7. मंधता 1236 1575
8. नेपानगर 1264 1575
9. राजनगर 732 2484
10. राजपुर 732 2485
11. सुवासरा 350 2976
 

भाजपा के 4 मंत्री हारे 

- ग्वालिय दक्षिण गृह राज्यमंत्री नारायण सिंह कुशवाहा को सबसे कम सिर्फ 121 वोटों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा, जबकि नोटा पर 1,550 वोट पड़े।
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- दमोह में वित्त मंत्री जयंत मलैया सिर्फ 799 वोटों से हार गए जबिक नोटा को 1,299 वोट मिले। 

- जबलपुर (उत्तर) से स्वास्थ्य राज्यमंत्री शरद जैन महज 578 वोटों से हारे जबकि नोटा पर 1209 वोट पड़े। 

- बुरहानपुर विधानसभा सीट से महिला और बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस 5,120 वोटों से चुनाव हारीं, जबकि नोटा पर करीब 5,700 वोट पड़े। 

इस बार मध्यप्रदेश में भाजपा की हार की सबसे बड़ी वजह एंटी इंकम्बेंसी नहीं बल्कि सवर्ण आंदोलन रहा। अगर एंटी इंकम्बेंसी होती तो 15 साल के शासन के बाद भी भाजपा और शिवराज कांग्रेस को इतनी कड़ी टक्कर नहीं दे पाते। भाजपा का 109 के आंकड़े तक पहुंचना बताता है कि कांग्रेस को जीत किन वजहों में मिली है।
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