कांग्रेस पार्टी ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक जो उम्मीदवार घोषित किए हैं, उनमें 75 पुराने उम्मीदवारों का टिकट काट कर नए चेहरों को मौका दे दिया है। साथ ही 98 पुराने प्रत्याशियों को फिर से चुनाव मैदान में उतारकर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि कांग्रेस पार्टी बदलाव की राह पर है, मगर पुराने नेताओं को भी किनारे नहीं करेंगे।कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी 173 उम्मीदवारों में से करीब दो दर्जन युवा हैं, जबकि 21 से ज्यादा महिलाओं को भी टिकट दिया गया है।पार्टी ने उन प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है जो दो-तीन बार विधायक बन चुके हैं।उन्हें टिकट मिला है या फिर उनके किसी परिजन को मैदान में उतारा है।
हालांकि पार्टी ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं को नाराज करना उचित नहीं समझा।अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो उनके पुत्र-पुत्री या भाई-भतीजे को टिकट दे दिया गया है। पार्टी ने अपने पुराने दिग्गज नेताओं अजय सिंह, आरिफ अकील, बाला बच्चन, डाॅ. गोविंद सिंह, राम निवास रावत व केपी सिंह समेत 98 नेताओं को मैदान में उतारा है।युवा कांग्रेस के कोटे से नेवी जैन सागर से, कुणाल चौधरी कालापीपल से और शहपुरा से भूपेंद्र मरावी तथा एनएसयूआई कोटे से विपिन वानखेड़े व महाराजपुर से नीरज दीक्षित को टिकट दिया गया है।भोपाल के पूर्व विधायक रहे रमेश शर्मा कहते हैं कि नए उम्मीदवारों को मौक़ा देने से पार्टी को फ़ायदा होता है।नया वोटर पढ़ा-लिखा है और वह इस बदलाव को कहीं न कहीं स्वीकार भी करता है।
भोपाल व्यापार मंडल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुनील पंजाबी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने कई नए चेहरों को मौका दिया है, लेकिन कई दशकों से पार्टी को विपक्ष में रह कर जो भूमिका निभानी चाहिए थी, वह दिखाई नहीं पडी।राहुल गांधी के रोड शो और जनसभाएं युवाओं को लुभा रही हैं, मगर वे वोट किसे देंगे, अभी तक यह मन नहीं बना पाए हैं।हां, अगर वे अपनी पार्टी के नेताओं में हो रही नूरा-कुश्ती रोकने में कामयाब हो गए तो चुनाव परिणाम बदल भी सकता है।दूसरा, कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री की घोषणा नहीं की है।यह बात भी कहीं न कहीं मतदाताओं को खल रही है।क्या शिवराज को एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर का नुकसान हो रहा है, इस सवाल के जवाब में व्यापारी नेता ने कहा, देखिये आम आदमी को केवल वर्तमान के काम, और वह भी वे कार्य, जिनसे उन्हें सीधे तौर पर फायदा हो रहा है, बस इसी से मतलब है।उसे इस बात से कोई इत्तेफाक नहीं है कि राज्य सरकार के उपर कर्ज कितना चढ़ा है।
पूर्व विधायक डॉ. गोविंद सिंह व रामनिवास रावत का मानना है कि कांग्रेस पार्टी ने जीत के नजरिये को ध्यान में रखकर ही टिकटों का वितरण किया है।यइ बात सही है कि चुनाव में जातिगत समीकरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।यह एक बड़ा फ़ैक्टर होता है।कांग्रेस पार्टी ने ऐसा नहीं किया है कि सभी पुराने विधायकों या नेताओं के टिकट काट दिए हैं, उन्हें भी पार्टी ने मौका दिया इै।इन नेताओं का दावा है कि पार्टी को इसका निश्चित तोर पर फायदा पहुंचेगा।टिकट वितरण में परिवारवाद और रिश्तेदारी सब चली है...
कांग्रेस पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्द्घन सिंह, छोटे भाई एवं पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह, भतीजे प्रियव्रत सिंह, सांसद कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया और भतीजी कलावती भूरिया चुनाव मैदान में हैं।पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी अपने बेटे नितिन चतुर्वेदी को टिकट दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।हालाँकि उनके परिवार से ही छोटे भाई आलोक चतुर्वेदी को छतरपुर से टिकट मौका है।सुंदरलाल तिवारी की बहू अरुणा तिवारी समेत पूर्व मंत्री इंद्रजीत पटेल के बेटे कमलेश्वर पटेल मैदान में हैं। पूर्व मंत्री हजारीलाल रघुवंशी के बेटे को सिवनी मालवा, जमुनादेवी के भतीजे उमंग सिंघार को गंधवानी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के भाई सचिन यादव को कसरावद से टिकट मिला है।अटेर से पूर्व विधायक सत्यदेव कटारे के बेटे हेमंत को टिकट मिला है।बता दे कीं हेमंत ने उपचुनाव भी जीता था।