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मध्य प्रदेश: त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव निरस्त होने के बाद वित्तीय अधिकार देने-लेने का खेल, पंचायत विभाग ने छीने, अब सीएम ने लौटाए

Mon, 17 Jan 2022 01:46 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सोमवार को त्रिस्तरीय पंचायतों को प्रशासकीय अधिकार देने का ऐलान किया है। इससे पूर्व सरपंच और सचिव भी राशि निकाल सकेंगे। 
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को त्रिस्तरीय पंचायतों को प्रशासकीय अधिकार देने का ऐलान किया है। इससे पूर्व सरपंच और सचिव भी राशि निकाल सकेंगे। चौहान ने सरपंचों, जनपद और जिला पंचायत प्रतिनिधियों को यह जिम्मेदारी दी है। कोरोना की तीसरी लहर की रोकथाम और काबू करने के लिए यह जिम्मेदारी दी गई है। 
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इससे पहले राज्य सरकार ने 4 जनवरी को आदेश जारी कर सरपंच व सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खातों का संचालन करने का अधिकार दिया था। जनपद और जिला पंचायत स्तर पर भी यह व्यवस्था लागू की गई। इसके दो दिन बाद ही राज्य सरकार ने पंचायत के संचालन की जिम्मेदारी प्रधान प्रशासकीय समिति से वापस ले ली थी। इसमें सरपंचों को दिए वित्तीय अधिकार भी शामिल थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अपने ही फैसले को निरस्त कर दिया था। 



22 हजार पंचायतों का कार्यकाल खत्म
मध्य प्रदेश में मार्च 2020 में 22 हजार 604 पंचायतों में पंच और सरपंच का कार्यकाल खत्म हो चुका है। 841 जिला और 6774 जनपद पंचायत सदस्य भी कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। नियमों के अनुसार चुनाव होने हैं। पहले कोरोना और अब ओबीसी आरक्षण के मसले पर चुनाव टलते जा रहे हैं। इस बीच, जनवरी में ही अब तक दो बार अधिकार दिए गए और एक बार छीन लिए गए। अब कोरोना के बहाने यह अधिकार दिए जाने की बात की जा रही है। ताकि क्राइसिस मैनेजमेंट समितियों को ताकत मिलें। पंचायत स्तर पर सरपंच और पंच, ब्लॉक स्तर पर जनपद अध्यक्ष और सदस्य तथा जिला स्तर पर जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्य जिम्मेदारी संभालेंगे।
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