कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, हरदीप सिंह डंग और कुणाल चौधरी ने कहा कि आप भरोसा रखें, हम टेस्ट के लिए तैयार हैं। वहीं बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाहा, रामबाई और सपा विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि बोले- सरकार पर भरोसा है। पूरे पांच साल चलेगी। निर्दलीय विधायकों में सुरेंद्र सिंह ठाकुर और केदार डाबर भी मंच के पास पहुंचे और सीएम कमलनाथ से कहा कि हमारा समर्थन जारी रहेगा। सभी विधायकों ने एक स्वर में कहा कि हमें आपके नेतृत्व में सरकार पर भरोसा है, चाहें तो फ्लोर टेस्ट करा लें।
इन विधायकों ने रखी शिकायत
बिसाहूलाल सिंह ने कहा कि सरकार में आदिवासी वर्ग से 30 से ज्यादा विधायक हैं फिर भी मंत्रिमंडल में इन्हें तवज्जो नहीं दी गई। वहीं, हरदीप सिंह डंग ने अधिकारियों को निर्देश देने की मांग रखी कि अधिकारी विधायकों का सम्मान करें। बैठक में कुछ विधायकों ने लोकसभा चुनाव की हार की समीक्षा करने और ग्वालियर-चंबल में भाजपा के बागियों को कांग्रेस में शामिल किए जाने से हुए नुकसान का मुद्दा उठाया तो कमलनाथ ने इन मुद्दों पर बाद में समीक्षा बैठक बुलाकर बात करने के लिए आश्वस्त किया।
व्यापमं, माखनलाल विवि के घोटालों की हो जांच
इससे पहले सुबह कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक भी हुई। सरकार की स्थिरता को लेकर चल रही अटकलों पर मंत्रियों ने सीएम को भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिर रहेगी। चाहें तो फ्लोर टेस्ट करवा लें। मंत्रियों ने सुझाव दिया कि पिछले 15 साल में हुए घोटालों की जांच कराई जाए। खासकर ई-टेंडर, माखनलाल यूनिवर्सिटी, सिंहस्थ और व्यापमं की जांच तेज करें।
बता दें कि प्रदेश के पूर्व सीएम और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह ने भी कांग्रेस में अंतर्कलह की ओर इशारा किया था। शनिवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा था कि भाजपा की संस्कृति खरीद-फरोख्त और जोड़-तोड़ की नहीं रही है और न ही इन तरीकों से सरकार गिराने में भाजपा विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए कांग्रेस सरकार चलाए, हमारी रुचि सरकार गिराने में नहीं है। कांग्रेस के अंतर्विरोध और उन्हें समर्थन करने वालों की वजह से सरकार गिर जाए तो अलग बात है और फिर इसमें भाजपा क्या कर सकती है। मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल आने के बाद से ही भाजपा नेता दावा कर रहे हैं कि कुछ कांग्रेसी विधायक उनके संपर्क में हैं।