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इंदौर: 'ताई' को छोड़ इन तीन नामों पर चर्चा जारी, कैलाश विजयवर्गीय का चुनाव लड़ने से इनकार

Wed, 17 Apr 2019 11:45 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय
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इंदौर लोकसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर भाजपा अब भी किसी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंच सकी है। उधर पश्चिम बंगाल प्रभारी और पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा की है।
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ताई सुमित्रा महाजन को टिकट न देने की चर्चा के बाद इस सीट से कई दावेदार सामने आए हैं। लेकिन, पार्टी तीन नामों पर चर्चा कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इन तीनों में से किसी एक को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।  
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इंदौर में प्रत्याशी तय करने से पहले भाजपा नेतृत्व एक बार फिर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से बात करेगा। यहां से शंकर ललवानी, भंवर सिंह शेखावत और गोपीकृष्ण नेमा के बीच मुकाबला चल रहा है। हालांकि इस रेस में शंकर ललवानी आगे बताए जा रहे हैं। 
 

इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने "पीटीआई-भाषा" को दिये साक्षात्कार में कहा था, "राजनीति से सरकारी नौकरी की बिल्कुल भी तुलना नहीं की जा सकती। सरकारी नौकरी में सेवानिवृत्ति की उम्र पहले से तय होती है। लेकिन राजनीति में ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि आम जनता के दुःख-सुख से सीधे जुड़े राजनेता न तो घड़ी देखकर काम करते हैं, न ही वे बंधा-बंधाया जीवन जीते हैं।" 

उन्होंने इस साक्षात्कार में याद दिलाया, "मोरारजी देसाई अपनी उम्र के 81वें साल में देश के प्रधानमंत्री बने थे।" इंदौर से वर्ष 1989 से लगातार आठ बार चुनाव जीतने वाली महाजन को मध्यप्रदेश की इस सीट से भाजपा के टिकट का शीर्ष दावेदार माना जा रहा था। इससे पहले, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक पत्रिका को दिये गए साक्षात्कार में कहा था कि यह उनकी पार्टी का फैसला है कि 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया जायेगा। 
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कांग्रेस ने इंदौर से पंकज संघवी को बनाया उम्मीदवार

कांग्रेस ने इंदौर से गुजराती समाज के अध्यक्ष पंकज सिंघवी को उम्मीदवार बनाया है। संघवी पहले भी कांग्रेस के उम्मीदवार रह चुके है। 1998 में संघवी भाजपा प्रत्याशी सुमित्रा महाजन से सिर्फ 49 हजार वोटों से हारे थे। इंदौर में गुजराती समाज के डेढ़ लाख से ज्यादा वोट हैं। संघवी को मुख्यमंत्री कमलनाथ का समर्थक माना जाता है।

संघवी ने 2013 में इंदौर-5 विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ा था लेकिन, इस चुनाव में भी वह भाजपा के महेंद्र हार्डिया से 11 हजार वोटों से हार गए थे। 

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