कांग्रेस को राहत तभी होगी, जब डामोर विधायकी छोड़ कर संसद पहुंचें, लेकिन ऐसा नहीं होने पर दिक्कत हो सकती है। कारण कि भाजपा सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पार्टी ने डामोर के इस्तीफे को लेकर किसी तरह का फैसला नहीं किया है।
हालांकि प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह कहते हैं कि जब उन्हें लोकसभा चुनाव लड़वाया है तो पार्टी उनका उपयोग संसद में ही करेगी। वे कहते हैं कि अभी 14 दिन का वक्त है। सारे तकनीकी पक्ष पर विचार करने के बाद इस बारे में पार्टी फैसला लेगी।
डामोर के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद झाबुआ विधानसभा सीट खाली हो जाएगी। ऐसी स्थिति में यहां उपचुनाव होना तय है। यह उपचुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम कर सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि इस उपचुनाव में कांग्रेस जीत गई तो उसके 116 विधायक हो जाएंगे और वह विधानसभा में स्पष्ट बहुमत में आ जाएगी। हालांकि भाजपा के 'अल्पमत कांग्रेस सरकार' वाले आरोपों और दावों के बीच कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती यह भी रहेगी कि वह अपने विधायकों को न टूटने दे।