डॉ. क्षितिज खरे
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मध्यप्रदेश के इंदौर के डॉ. क्षितिज खरे को सन 2020 का 'यंग स्टैटिसटिकल साइंटिस्ट अवॉर्ड' मिला है। उन्हें यह पुरस्कार थ्योरी एंड मेथड्स के क्षेत्र मे दिया गया है। इस श्रेणी में विश्व भर में एक व्यक्ति को प्रतिवर्ष यह पुरस्कार दिया जाता है। इंटरनेशनल इंडियन स्टेटिस्टिकल एसोसिएशन विश्वभर के भारतीय सांख्यिकी शास्त्रीयों का संगठन है, जिसका मुख्यालय अमेरिका के वॉशिंग्टन में है। यह संगठन प्रतिवर्ष 'यंग स्टेटिस्टिकल सइंटिस्ट अवार्ड' प्रदान करता है।
इस पुरस्कार के लिए हर साल आवेदन मंगाए जाते हैं और किसी वरिष्ठ वैज्ञानिक के द्वारा पुरस्कार के लिए युवा वैज्ञानिकों को नामित किया जाता है। इसके बाद तमाम नामित व्यक्तियों में से एक का चयन एक उप समिति करती है। क्षितिज का नाम प्रसिद्ध सांख्यिकीविद जॉर्ज माइकेलिडिस ने किया और उन्हीं के माध्यम से अवॉर्ड की सूचना क्षितिज को दी की गई।क्षितिज खरे के पिता दीपक खरे और माता डॉ. सुनीता खरे ने यह जानकारी दी।
38 वर्षिय प्रो. क्षितिज खरे की 12वीं तक की शिक्षा चोइथराम स्कूल इंदौर में हुई। स्कूली शिक्षा के दौरान उन्हें नेशनल टैलेंट स्कॉलरशिप प्राप्त हुई। साथ ही गणित के ओलंपियाड में स्थानीय स्तर पर प्रथम स्थान एवं राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट, कोलकाता से बी स्टॅट की परीक्षा में सन 2002 में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक हासिल किया था। क्षितिज ने इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली से एम स्टॅट किया। यहां उन्होंने 2004 में प्रथम स्थान पाया और स्वर्ण पदक विजेता रहे।
2009 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका से प्रोफेसर पर्सी डायकोनिस के मार्गदर्शन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उसी वर्ष स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से फाइनेंशियल मैथमेटिक्स में स्नातकोत्तर की उपाधि भी प्राप्त की। वर्तमान में क्षितिज गेंसविल फ्लोरिडा में युनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनके मार्गदर्शन में 12 विद्यार्थी पीएचडी कर चुके हैं एवं अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त शोध पत्रिकाओं मे उनके लगभग 50 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
क्षितिज अच्छे शास्त्रीय गायक हैं। दस वर्ष की आयु मे उनके द्वारा स्वामी विवेकानंद पर 'योद्धा संन्यासी' नामक एकल कथन का कार्यक्रम किया गया था, जिसके विभिन्न स्थानों पर प्रयोग किए गए। इनमें कोलकाता के बेलूर मठ में, शारदा पीठ की स्वर्ण जयंती पर किया गया कार्यक्रम विशेष उल्लेखनीय है।