फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मॉडलिंग से संत परंपरा में आए थे भय्यू महाराज

Wed, 13 Jun 2018 12:25 PM IST
प्रकाश हिंदुस्तानी, इंदौर
विज्ञापन
maharaj bhayyu ji
विज्ञापन
मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के प्रमुख आध्यात्मिक संत भय्यू महाराज (उदयसिंह देशमुख ) ने 12 जून 2018 की दोपहर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। उनकी उम्र 49 साल थी। भय्यू महाराज ने कई रचनात्मक और धार्मिक कार्य किए। श्री सद्गुरू धार्मिक ट्रस्ट के नाम से उनका ट्रस्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में अनेक सेवा कार्य कर रहा है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, जिसे भय्यू महाराज ने अस्वीकार कर दिया था। 
विज्ञापन


भय्यू महाराज की राजनैतिक क्षेत्रों में अच्छी पकड़ थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनके ट्रस्ट के आयोजनों में दो बार जा चुके हैं। प्रधानमंत्री पद की शपथ के दौरान भी भय्यू महाराज दिल्ली में मौजूद थे। 

पिछले दो वर्षों में भय्यू महाराज कई बार अस्पताल में भर्ती रहे। डॉक्टरों के अनुसार वे भारी डिप्रेशन में थे। इस कारण सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी उनका आना-जाना कम हो गया था। किसानों, ग्रामीणों और बच्चों से जुड़े उनके सेवा कार्य कुछ धीमे पड़ गए थे। करीब 7 साल पहले अगस्त 2011 में जब अन्ना हजारे का आंदोलन उफान पर था, तब वे अन्ना हजारे के पक्ष में खड़े थे। लोकपाल बिल को लेकर जब अन्ना हजारे ने आमरण अनशन किया था, तब उस अनशन का त्याग भय्यू महाराज की उपस्थिति में किया गया था। 
विज्ञापन


उनकी पहली पत्नी माधवी देशमुख की मृत्यु नवंबर 2015 में हार्ट अटैक से हुई थी, इसके बाद 30 अप्रैल 2017 को उन्होंने शिवपुरी की रहने वाली डॉ. आयुषी शर्मा से शादी की थी। इस तरह की चर्चाएं भी है कि उनकी बेटी और दूसरी पत्नी के संबंधों में मधुरता नहीं थी। यह भी भय्यू महाराज के तनाव का एक कारण हो सकता है। 

मॉडलिंग से अपना करियर शुरू करने वाले उदयसिंह देशमुख की रूचि शुरू से ही समाजसेवा और धार्मिक कार्यों में रही। उन्होंने महाराष्ट्र की संत परंपरा के अनुसार समाजसेवा को अपनाया और अनेक सेवा प्रकल्प शुरू किए। 
विज्ञापन

maharaj bhayyu ji
वे क्या करते थे?

यह सवाल नहीं है, सवाल यह है कि वे क्या नहीं करते थे? वे स्कॉलरशिप बांटते थे, कैदियों के बच्चों को पढ़ाते थे, किसानों को खाद-बीज मुफ्त बांटते थे, गांवों में तालाब खुदवाते थे, पौधारोपण करवाते थे, बीमारों के लिए इलाज का इंतजाम करते थे, सामूहिक विवाहों की योजना बनाते थे, भारत माता के प्रति लोगों में जागरुकता लाते थे, प्रकृति की सेवा के लिए निसर्ग साधना केन्द्र खोलते थे।

संस्कृति के विस्तार के लिए भारतीय संस्कृति ज्ञान मंदिर और ऋषि संकुल खोलते थे, गांव के बच्चों के लिए वंदे मातरम् नेशनल फाउंडेशन की स्थापना करते थे, भारतीय संविधान के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए संविधान के सारांश की पुस्तिकाएं बंटवाते थे; इसके अलावा वे प्रवचन देते थे, लोगों को जागरुक करते थे, लेख लिखते थे, कविताएं लिखते थे, गाने और भजन गाते थे, लोगों को धार्मिक और सामाजिक मामलों में मार्गदर्शन देते थे, बेचारे मंत्री और उद्योगपति आ जाएं, तो उनको भी सलाह दे देते थे।  कुल मिलाकर वे एक विलक्षण व्यक्ति थे। 

जिसने भी भय्यू महाराज की आत्महत्या की खबर सुनी, वह सन्न रह गया। उन्होंने सिल्वर स्प्रिंग स्थित अपने आवास पर अपनी दायीं कनपटी पर गोली मार ली। परिजन उन्हें इन्दौर के बॉम्बे हास्पिटल ले गए। देखते ही देखते वहां बड़ी संख्या में उनके भक्तों की भीड़ जमा हो गई। इसी बीच डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें