सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को लेकर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की उपस्थिति में उज्जैन में दो दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज भी आशीर्वाद देने पहुंचे। इस दौरान देशभर से आए किन्नर संतों ने आगामी सिंहस्थ महाकुंभ सहित अन्य कुंभ आयोजनों को लेकर चर्चा की। इस बीच ऋषि अजय दास को लेकर जो बयान दिया गया उसको लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है।
बैठक में किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास द्वारा अखाड़े पर अपना आधिपत्य जताने को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की गई। संतों ने कहा कि किन्नर अखाड़े में सभी की राय से निर्णय लिए जाते हैं, किसी एक व्यक्ति की नहीं चलती। उन्होंने यह भी कहा कि जो गृहस्थ है, वह आखिर किस प्रकार ऋषि हो सकता है।
'पेपर दिखाने से सत्य स्थापित नहीं होता'
इस अवसर पर सूरत से दिलीपनंद गिरी, तेलंगाना से महाकालीनंद गिरी, राजस्थान से कामाख्या नंद गिरी (सीतारमण), यूपी के प्रतापगढ़ स्थित गढ़ी मानिकपुर से रेखानंद गिरी को महामंडलेश्वर बनाया गया। वहीं गुजरात की नंदिनीनंद गिरी और महाराष्ट्र के अकोला से गणेशानंद गिरी को श्री महंत की उपाधि दी गई। इसके अलावा इंदौर की सुनहरी नंद गिरी, आकांक्षा नंद गिरी, गुंजन नंद गिरी, अलोपी नंद गिरी और खुशीनंद गिरी को भी श्री महंत बनाया गया।