सार
दमोह के मड़ियादो क्षेत्र के तीन भाइयों को करीब 17 साल पुराने हत्या के मामले में हाईकोर्ट जबलपुर ने बरी कर दिया। परिवार के मुताबिक, तीनों ने करीब दस साल जेल में बिताए। इस दौरान एक भाई की मौत हो गई, जबकि दो भाई दिल्ली में मजदूरी कर रहे हैं। परिवार का दावा है कि मुकदमे के चलते जमीन-जायदाद भी बिक गई।
एक हत्या के मामले में करीब 17 साल तक आरोपी होने का दंश झेलने वाले मड़ियादो क्षेत्र के तीन भाइयों को हाईकोर्ट, जबलपुर ने बरी कर दिया है। मामले की जांच और अभियोजन की स्थिति पर सवाल उठाते हुए अदालत ने तीनों को दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, जब अदालत से उन्हें राहत मिली, तब तक इस मामले का परिवार पर गहरा असर पड़ चुका था। तीन भाइयों में एक की मौत हो चुकी है, जबकि दो भाई गांव छोड़कर दिल्ली में परिवार के साथ मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं।
परिवार के मुताबिक, हत्या के मामले में तीनों भाइयों को आरोपी बनाया गया था। मामले की लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने करीब दस साल जेल में बिताए। बाद में दोनों भाई जमानत पर बाहर आए और मामला अदालत में चलता रहा।
फैसला आया तो परिवार में खुशी, लेकिन जिंदगी में बहुत कुछ बदल चुका था
हाईकोर्ट से बरी होने की खबर के बाद परिवार में खुशी का माहौल है, लेकिन बीते वर्षों की मुश्किलों ने परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया। आरोपियों की मां लक्ष्मी रानी का कहना है कि मुकदमे के दौरान परिवार की जमीन-जायदाद तक बिक गई और अब उनके पास कुछ खास नहीं बचा है। परिवार के अनुसार, मनमोहन की मौत हो चुकी है। वहीं, तुलसी और हरप्रसाद पाली अब दिल्ली के करोलबाग में अपने परिवार के साथ रहकर मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांव और घर छोड़ने के बाद अब उनका जीवन रोजी-रोटी की जद्दोजहद में बीत रहा है।
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मां बोलीं- बर्बाद हो गया परिवार
आरोपियों की मां लक्ष्मी रानी ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि परिवार ने वर्षों तक मुकदमे का बोझ झेला। इस दौरान आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई और जमीन-जायदाद बेचने की नौबत आ गई। उनका कहना है कि बेटे अब गांव से दूर दिल्ली में मजदूरी कर रहे हैं।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिवार को कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन उनका कहना है कि 17 वर्षों में जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई आसान नहीं है।