नववर्ष 2026 के प्रथम दिवस पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नगरी श्रद्धा, भक्ति और आस्था के महासागर में डूबी नजर आई। 1 जनवरी को देशभर से आए एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान ओंकारेश्वर एवं ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के दर्शन कर नए वर्ष का शुभारंभ किया। प्रतिदिन औसतन 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं के आगमन वाली इस तीर्थनगरी में नववर्ष पर रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिली। नगर की हर गली, हर घाट और हर मार्ग भक्ति-भाव से सराबोर नजर आया।
नववर्ष के चलते ओंकारेश्वर नगर के सभी गेस्ट हाउस, होटल, लॉज एवं धर्मशालाएं पूरी तरह हाउसफुल रहीं। अधिकांश पर्यटन होटलों में पहले से ऑनलाइन बुकिंग थी। नगर की पार्किंगों में छोटे वाहनों की भरमार रही, वहीं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन को विशेष इंतजाम करने पड़े।
ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनूप सिंधिया ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए नगर से करीब 5 किलोमीटर पहले अस्थाई पार्किंग स्थल बनाए गए। सभी वाहनों को वहीं रोककर श्रद्धालुओं को टेंपो के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाया गया, जिससे यातायात व्यवस्था नियंत्रित बनी रही।
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ओंकारेश्वर मंदिर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि भीड़ को देखते हुए मंदिर के पट प्रातः साढ़े चार बजे ही खोल दिए गए थे। 25 दिसंबर से ही दर्शनार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, जो प्रतिदिन करीब 40 हजार तक पहुंच चुकी थी।
1 जनवरी को उमड़ी अपार भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सभी कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त कर दीं। मंदिर के अधिकारी और कर्मचारी पूरे दिन व्यवस्थाओं में जुटे रहे, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित दर्शन मिल सकें। 31 दिसंबर की रात भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने परिजनों के साथ ओंकारेश्वर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने नर्मदा तट पर भोजन-प्रसादी ग्रहण की और आध्यात्मिक वातावरण में नववर्ष का स्वागत किया।
मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश सहित देश के कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने ओंकारेश्वर पहुंचकर धर्म, आस्था और साधना के साथ नए वर्ष का स्वागत किया। मंदिर परिसर में सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं, जहां दर्शन में श्रद्धालुओं को तीन से चार घंटे तक का समय लगा।
नववर्ष 2026 पर ओंकारेश्वर ने यह साबित कर दिया कि यह केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा और अनुशासन का जीवंत संगम है, जहां प्रशासन, मंदिर समिति और श्रद्धालुओं के सहयोग से आस्था का पर्व शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।