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ओंकारेश्वर: कलशाभिषेक महोत्सव में गूंजे भक्ति के स्वर, निमाड़ के स्वर साधकों का हुआ सम्मान

Sat, 26 Sep 2026 09:24 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर

सार

ओंकारेश्वर के समीप मोरटक्का में कलशाभिषेक महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में जिनेंद्र पूजन, कलशाभिषेक, ध्वजारोहण और भक्ति संगीत हुआ। कासलीवाल स्मृति स्वर साधना सम्मान से निमाड़ के गायन-वादन साधकों को सम्मानित किया गया। धार्मिक सेवाओं से जुड़े ब्रह्मचारी, प्रवचनकार, विद्वानों और समाजसेवियों का भी सम्मान किया गया।
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कलशाभिषेक महोत्सव में संगीतमय जिनेंद्र पूजन का आयोजन हुआ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीर्थनगरी ओंकारेश्वर के समीप मोरटक्का में धर्म, भक्ति, संगीत और समाजसेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। मोरटक्का स्थित ओंकारबाग जैन धर्मशाला में भादव सुदी पूर्णिमा एवं वीर निर्वाण के पावन अवसर पर कासलीवाल स्मृति स्वर साधना सम्मान समारोह का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। सवा सौ वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा के क्रम में आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में समाजजन, धर्मप्रेमी नागरिक और गणमान्य अतिथि शामिल हुए।
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धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति संगीत से सराबोर इस आयोजन की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। श्रद्धालु धार्मिक भावनाओं के साथ कलश लेकर आयोजन स्थल पहुंचे। इसके बाद संगीतमय जिनेंद्र पूजन का आयोजन हुआ। भक्ति के स्वर और धार्मिक मंत्रोच्चार से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र की विधिवत पूजा-अर्चना कर श्रीजी का कलशाभिषेक किया और धर्म एवं आस्था के इस महोत्सव में सहभागिता की। कलशाभिषेक के दौरान धर्मशाला परिसर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण दिखाई दिया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों ने आयोजन को सांस्कृतिक स्वरूप भी प्रदान किया। आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ भक्ति और आध्यात्मिक अनुभूति का लाभ लिया।

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निमाड़ के स्वर साधकों का सम्मान
समारोह का प्रमुख आकर्षण कासलीवाल स्मृति स्वर साधना सम्मान रहा। निमाड़ क्षेत्र में गायन और वादन के माध्यम से संगीत साधना को आगे बढ़ाने वाले स्वर साधकों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान जैन रत्न स्वर्गीय देवकुमार कासलीवाल, स्वर्गीय अजितकुमारसिंह कासलीवाल एवं स्वर्गीय प्रदीपकुमारसिंह कासलीवाल की स्मृति में प्रदान किया गया। आयोजकों का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगीत और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले साधकों के योगदान को सम्मान देना भी रहा। संगीत को साधना मानकर वर्षों से अपनी कला के माध्यम से समाज और धार्मिक आयोजनों में योगदान देने वाले कलाकारों का सम्मान समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने कहा कि किसी भी परंपरा की निरंतरता केवल धार्मिक अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि उससे जुड़े संस्कारों, कला, संगीत और सेवा भाव को आगे बढ़ाने से बनी रहती है। इसी भावना के साथ स्वर साधकों का सम्मान किया गया।

 
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महोत्सव में बड़ी संख्या में समाजजन, धर्मप्रेमी नागरिक और गणमान्य अतिथि शामिल हुए। - फोटो : अमर उजाला
धार्मिक सेवाओं से जुड़े लोगों का भी सम्मान
समारोह में दशलक्षण धर्म एवं पर्यूषण पर्व के दौरान विभिन्न ग्रामों और नगरों में धार्मिक सेवाएं प्रदान करने वाले ब्रह्मचारी भैय्या, ब्रह्मचारिणी दीदी, प्रवचनकार, विद्वतजन एवं समाजसेवा में सक्रिय सेवाभावी लोगों का भी सम्मान किया गया।
धार्मिक आयोजनों में अपनी सेवाएं देने वाले इन लोगों के योगदान को समाज के सामने सम्मानित करना कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पक्ष रहा। प्रवचन, धार्मिक मार्गदर्शन, आयोजन व्यवस्था और समाजसेवा के माध्यम से धार्मिक गतिविधियों को गति देने वाले लोगों को सम्मानित कर उनके सेवा भाव का अभिनंदन किया गया।

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प्रशासनिक अधिकारियों सहित गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी
समारोह में खंडवा जिला पुलिस अधीक्षक अगम जैन सहित प्रशासनिक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में एसडीएम ऋषि सिंघई, कसरावद एसडीएम अनिल जैन, बड़वाह जनपद पंचायत के सीईओ मुकेश जैन सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की। इसके अलावा न्यायिक क्षेत्र, वन विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। व्यापारी आलोक सेठी सहित बड़ी संख्या में समाजजन और धर्मप्रेमी नागरिकों ने समारोह में भाग लिया। धार्मिक कार्यक्रम के साथ समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता दिखाई दी, जिससे आयोजन धर्म और सामाजिक समरसता का मंच बनता नजर आया।

ध्वजारोहण और वात्सल्य भोज ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। ध्वजारोहण के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक भावनाओं के साथ सहभागिता की। इसके बाद वात्सल्य भोज का आयोजन हुआ, जिसमें समाजजनों ने प्रसादी ग्रहण की। दिनभर चले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद शाम को भक्ति कार्यक्रम एवं मंगल आरती का आयोजन किया गया। भक्ति गीतों और धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालु देर तक आयोजन से जुड़े रहे। मंगल आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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