प्रभु श्री राम को यहीं से मिले थे अस्त्र शस्त्र
सुनील जैन बताते हैं कि खंडवा की धार्मिक और पुरातात्विक धरोहरों में से एक तुलजा भवानी माता मंदिर शहर के भवानी माता वार्ड में स्थापित है। रामायण और महाभारत कालीन इस मंदिर में मां भवानी की स्वयंभू मूर्ति विराजित है। 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने सीता माता और लक्ष्मण समेत खांडव वन तत्कालीन नाम में ही व्यतीत किए थे। भगवान श्रीराम ने इस मंदिर में नौ दिनों तक मां तुलजा भवानी की आराधना की थी। प्रभु श्रीराम ने तुलजा मां से अस्त्र-शस्त्र और वरदान लेकर दक्षिण की ओर प्रस्थान किया था।
छत्रपति शिवाजी को भी मिली थी शमशीर
महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने धनुर्धर अर्जुन के साथ यहीं पर अग्नि देव का अर्जीण रोग का उपचार तृप्त किया था। साथ ही देवी की शक्ति से इंद्र को वर्षा करने से रोका था। मां भवानी मराठा नायक छत्रपति शिवाजी की भी आराध्य देवी रही हैं। कहा जाता है कि मां भवानी ने इसी मंदिर में उन्हें शमशीर प्रदान की थी। जिससे महाराज शिवाजी ने मुगलों का सामना किया था।
करें मां तुलजा भवानी के दर्शन।
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भवानी माता मंदिर में ऐसा है मां का स्वरूप
बता दें कि, भवानी माता मंदिर में मां की सिंह पर सवार अष्टभुजी प्रतिमा है। मां भवानी साक्षात सिद्धीदात्री हैं, वे राक्षस का वध कर रही हैं। हालांकि, प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किए जाने के कारण श्रद्धालुओं को मां का यह स्वरूप दिखाई नहीं देता है। लगभग डेढ़ एकड़ में फैले इस मंदिर का वर्तमान भवन पचास साल पहले बनाया गया है। मंदिर के पुजारी गौरव राजेंद्र चौहान ने बताया कि माताजी मंदिर प्रांगण में भोले बाबा विराट स्वरूप में विराजमान हैं। भगवान श्री राम का दरबार भी है। नवरात्रि पर्व पर प्रतिदिन सुबह मां का अभिषेक और विशेष श्रृंगार कर आरती की जाती है। इसके बाद रात आठ बजे महाआरती भी की जा रही है।