देशभर में आज महान पार्श्वगायक और हरफनमौला कलाकार स्वर्गीय किशोर कुमार की जयंती मनाई गई। उनके जन्मस्थान मध्य प्रदेश के खंडवा में इस अवसर को 'खंडवा गौरव दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर समारोह में शामिल होने यहां पहुंचे प्रसिद्ध पार्श्वगायक विनोद राठौड़ भावुक हो उठे। उन्होंने सबसे पहले किशोर कुमार की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके लोकप्रिय गीत गुनगुनाकर सुरमयी श्रद्धांजलि दी।
देर शाम आयोजित होने वाले समारोह में गायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए विनोद राठौड़ को 'किशोर सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा। सम्मान स्वरूप उन्हें एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि और ताम्रपत्र प्रदान किया जाएगा।
सुबह से उमड़े किशोर प्रेमी
आज सुबह से ही बड़ी संख्या में प्रशंसक किशोर कुमार के पैतृक निवास गांगुली हाउस और समाधि स्थल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। वहीं शाम को स्थानीय पुरानी अनाज मंडी में 'किशोर नाइट' का आयोजन होगा, जिसमें बॉलीवुड गायक पी. गणेश और प्रीति जोशी किशोर कुमार के सदाबहार गीतों की प्रस्तुति देंगे।
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किशोर दा कहीं नहीं गए, आज भी यहीं हैं
मीडिया से बातचीत में विनोद राठौड़ ने कहा कि दुनिया में कहीं भी चले जाएं, लेकिन जो अपनापन, आशीर्वाद और सुकून किशोर कुमार से मिलता है, वह केवल खंडवा में ही महसूस होता है। उन्होंने कहा- यदि मेरा दोबारा जन्म हो तो मैं खंडवा में ही जन्म लेना चाहूंगा। यहां आकर ऐसा लगता है कि किशोर दा कहीं नहीं गए, बल्कि आज भी हमारे सामने खड़े हैं। इस नगरी के सातों सुरों में उनका प्यार बसता है।
किशोर सम्मान मिलने पर राठौड़ ने कहा कि फिल्मी पुरस्कार तो कई मिलते हैं, लेकिन यह सम्मान उनके लिए विशेष और भावनात्मक है। उन्होंने कहा कि किशोर कुमार जैसे महान कलाकार के लिए भारत रत्न भी छोटा सम्मान है। उनके अनुसार दुनिया को उनके लिए किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर का सर्वोच्च सम्मान स्थापित करना चाहिए। किशोर कुमार के पैतृक मकान की जर्जर स्थिति पर उन्होंने कहा- "खंडहरों में भी महादेव का वास होता है। ऐसे स्थानों का अपना अलग महत्व और आस्था होती है।"
बॉलीवुड और अपने स्पष्ट विचारों पर बोलते हुए विनोद राठौड़ ने कहा कि वे हमेशा बेबाकी से सच बोलते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मैं किसी पॉडकास्ट में बैठ गया तो पता नहीं क्या-क्या बोल दूं। लोग हमेशा सच सुनने के आदी नहीं होते। इसलिए मैंने बॉलीवुड से दूरी नहीं बनाई, बल्कि थोड़ा अलग रहना पसंद किया है। हालांकि सलमान खान, गोविंदा और संजय दत्त आज भी मेरे अपने हैं। उन्होंने कहा कि खंडवा आना और किशोर सम्मान प्राप्त करना उनके जीवन के सबसे यादगार और भावुक पलों में से एक है।