रायपुर केंद्रीय विद्यालय की एक बायोलॉजी टीचर ने लड़कियों को नसीहत देते हुए कहा है कि वो लिपस्टिक ना लगाएं और ना ही भड़कीले कपड़े पहनें क्योंकि इससे निर्भया जैसे बलात्कार होते हैं। यह सारी बातें टीचर ने लड़कों की मौजूदगी में कहीं। उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों का रात में घर से बाहर जाना इस तरह की घटनाओं को आमंत्रण देता है।
टीचर स्नेहलता शंखवार ने क्लास को काउंसिलिंग सेशल में बदल दिया था। जिसमें उन्होंने लड़कियों को यह नसीहतें दी। लड़कियों के गुस्साए परिजनों ने प्रिंसिपल भगवान दास अहीर से मुलाकात की। प्रिंसिपल का कहना है कि की वह अभिवावकों द्वारा लिखिल शिकायत दर्ज होने के बाद जांच बिठाएंगे। केवी संगठन को इस मामले की जानकारी दे दी गई है। खबर के अनुसार कक्षा 9 और 11 की लड़कियों को काउंसिलिंग के नाम पर मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ता था। अपनी बात की सत्यता के लिए उन्होंने टीचर की इस तरह की बातें बोलते समय एक ऑडियो क्लिप पेश किया है।
टीचर ने लड़कियों को जींस पहनने और लिपस्टिक लगाने को लेकर चेतावनी दी थी। क्लिप में टीचर कहती हैं कि जब लड़कियों का चेहरा खूबसूरत नहीं होता है तभी वह एक्सपोज करती है। लड़कियां इतनी बेशर्म कैसे हो सकती हैं? लड़कियां किसी लड़के के साथ रात को बाहर कैसे जा सकती हैं जो उनका पति नहीं है? यह समझना काफी मुश्किल है कि इसका इतना बड़ा मुद्दा क्यों बनाया गया। इस तरह की घटनाएं अक्सर दूरदराज के क्षेत्रों में होती हैं।
टीचर यहीं नहीं रुकी वह क्लिप में यह करते हुए सुनी जा सकती हैं कि निर्भया की मां को अपनी बेटी को इतनी रात को बाहर जाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी। उनका मानना है कि यह लड़कों की नहीं बल्कि निर्भया की गलती थी। जिन लड़कियों के साथ इस तरह की घटनाएं होता हैं वह श्रापित हो जाती हैं और यह उनके लिए सजा होती है। जब लड़के किसी लड़की को एक लड़के साथ ऐसा करते हुए देखते हैं तो वे मान लेते हैं कि वो दूसरों के साथ भी कर लेंगी।
आरोपी टीचर का कहना है कि मैंने 11वीं की छात्रा को रात के 8:30 के बाद बाहर घूमते हुए देखकर घर जाने का सुझाव दिया। एक शख्स की सुरक्षा उसके खुद के हाथों में हैं। निर्भया के साथ जो हुआ वह गलत है लेकिन उसे इतनी देर तक बाहर नहीं रहना चाहिए था। उसे खुद को बचाना चाहिए था।