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कटनी: 10वीं की फर्जी अंकसूची पर बने ग्रामीण डाक सेवक, सीबीआई ने कसा शिकंजा, तीन कर्मचारी बर्खास्त

Wed, 30 Sep 2026 03:42 PM IST
कटनी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी

सार

फर्जी दस्तावेजों के जरिए डाक विभाग में नौकरी हासिल करने के मामले में सीबीआई ने कटनी में पदस्थ तीन कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। सीबीआई ने ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जी दसवीं की अंकसूची लगाने के आरोप में अब तक 8 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।
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दस्तावेजों की जांच करती सीबीआई
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विस्तार
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फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने वाले गिरोह की जांच अब कटनी तक पहुंच गई है। जबलपुर सीबीआई ने डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवक के पद पर दसवीं की फर्जी अंकसूची लगाकर नौकरी हासिल करने के मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें तीन आरोपी कटनी जिले में पदस्थ रहे हैं, जिन्हें नौकरी से बर्खास्त किया गया है। सीबीआई की कार्रवाई के बाद अब फर्जी दस्तावेजों के जरिए भर्ती की पूरी कड़ी खंगाली जा रही है।

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दरअसल पूरा मामला ग्रामीण डाक सेवक भर्ती से जुड़ा है, जहां जनवरी 2024 और जुलाई 2024 में ग्रामीण डाक सेवा के लिए निकली भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों ने पोर्टल पर अपनी दसवीं की सेल्फ अटेस्टेड अंकसूची अपलोड की, जिसके आधार पर उन्हें नौकरी मिल गई। नौकरी लगने के बाद उनकी पोस्टिंग भी कर दी गई। बाद में जब उनकी दसवीं की अंकसूची की जांच कराई गई तो वास्तविकता सामने आ गई। डाकघर उपसंभाग क्रमांक 1 के सहायक अधीक्षक ने मामले की शिकायत जैसे ही सीबीआई में दर्ज करवाई तो फर्जी अंकसूची का पूरा मामला ही खुल गया और डाक विभाग ने अस्थाई नियुक्तियां रद्द कर दीं।

बता दें कि जबलपुर सीबीआई ने पूरे मामले में 8 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है, जिसमें 3 आरोपी कटनी जिले में पदस्थ पाए गए। इनमें बद्रीप्रसाद यादव को कटनी के संसारपुर उपडाकघर, देवेन्द्र सिंह चौहान को उमरियापान और रमाकांत शर्मा को मोहतरा उपडाकघर में पदस्थ किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक इन तीनों ने अलग-अलग अवधि में इन पदों पर नौकरी की है।
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वहीं पूरे मामले में दर्ज हुई 8 एफआईआर के बाद टीमों ने आरोपियों के ठिकानों एक साथ छापेमारी कर दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। सीबीआई पकड़े गए आरोपियों मानवेन्द्र सिंह सिकरवार, बद्री प्रसाद यादव, देवेन्द्र सिंह चौहान, राजाबाबू अहिरवार, रमाकांत शर्मा, प्रदीप खरे, सौरभ शर्मा और नयन कुमार के साथ पूछताछ में जुटी है। 
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जांच का फोकस अब सिर्फ फर्जी अंकसूची लगाने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भर्ती प्रक्रिया में सहयोगी और कितने लोग इसमें शामिल थे।

 

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