सबसे पहले जानिए कौन है लाठीकांड की टीआई अरुणा वाहने?
कटनी जीआरपी टीआई अरुणा वाहने का नाम दबंग महिला अधिकारियों में गिना जाता है। वे आईएएस स्तर पर पुलिस विभाग में भर्ती हुई थीं। इसके पहले अरुणा जबलपुर में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। अपनी बेहतर कार्य प्रणाली के चलते वे अक्सर चर्चाओं में रही हैं। करीब सालभर पहले उन्हें कटनी जीआरपी थाने की कमान सौंपी गई थी। इसके बाद से उन्होंने दर्जनों मामलों का खुलासा करते हुए आधा सैकड़ा अपराधियों को जेल भेजा है। टीआई अरुणा वाहने ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे उड़ान सीरियल से ही प्रेरित होकर शासकीय नौकरी में आई। परिवार में शुरू से ही उनकी शिक्षा दीक्षा में विशेष ध्यान दिया था। शायद, यही कारण है की वो आज खाकी वर्दी पहनकर देश की सेवा कर रही हैं।
कौन वो दलित महिला और लड़का, जिनके साथ हुई मारपीट?
कटनी जीआरपी पुलिस की क्रूरता का शिकार हुई दादी और उसका पोता शातिर बदमाश दीपक वंशकार के मां और बेटे हैं। जिन्हें बदमाश दीपक के बारे में पूछताछ करने के लिए थाने लाया गया था। जहां पूछताछ के नाम पर उन्हें थर्ड डिग्री देना शुरू कर दिया। रेल पुलिस के मुताबिक दीपक वंशकार पर 19 केस दर्ज हैं और 10 हजार रुपये का इनाम है। इनामी बदमाश दीपक को जीआरपी पुलिस ने आखिरी बार लाखों रुपये के चोरी के माल के साथ गिरफ्तार किया था और उस पर जिला बदर की कार्रवाई करवाई थी। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी का बेटा या पिता अपराधी है तो क्या पुलिस को उनके परिजनों के साथ इस तरह से बेरहमी दिखाने का अधिकार है?
कैसे सुर्खियों में आया घटनाक्रम?
यह घटना भले ही 10 महीने पुरानी है, लेकिन पीड़ित परिवार के दलित होने के कारण वीडियो वायरल होते ही यह घटना सुर्खियों में आ गई। कांग्रेस ने तत्काल प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व सीएम कमलनाथ सहित कई कांग्रेस के बड़े नेताओं ने अपने एक्स अकाउंट से वीडियो ट्वीट करते हुए सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव को घेरा। एक तरफ कांग्रेस नेता इसे भाजपा को दलित विरोधी बताकर घेर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा घटना की निंदा करते हुए कांग्रेस को ऐसे मामले में राजनीति नहीं करने की सलाह दे रही है।
मामले में क्या कार्रवाई की गई?
बुजुर्ग महिला और उसके पोके के साथ हुई मारपीट का वीडियो सामने आते ही, सियासत शुरू हो गई। इसके बाद रेल पुलिस अधिकारी हरकत में आए और तत्काल टीआई अरुणा वाहने समेत चार पुरुष तो एक महिला आरक्षक को निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की जांच भोपाल डीआईजी अधिकारी को सौंपी गई। मामले की जानकारी लेने जबलपुर रेंज एसपी सिमाला प्रसाद कटनी पहुंची। उन्होंने बताया कि जीआरपी थाना प्रभारी अरुणा वाहने, प्रधान आरक्षक अजय श्रीवास्तव, आरक्षक वर्षा दुबे, ओमकार सिरसाम, सोहेब अब्बासी सहित सलमान खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए भोपाल डीआईजी को कटनी बुलवाकर सौंपी गई है। थाने से सीसीटीवी फुटेज कैसे वायरल हुआ इसकी भी जांच की जा रही है। हालांकि, एक मीडिया संस्थान को को दी गई बाइट में अरुणा वाहने ने कहा कि थाने से ही किसी ने यह वीडियो वायरल किया है।
10 वकीलों के साथ पटवारी थाने पहुंचे तो क्या हुआ?
पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए दलित परिवार से मिलने के लिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्वमंत्री लखन घनघोरिया, एमपी सोशल मीडिया प्रभारी मुकेश नायक, कटनी के दिग्गज नेता सौरभ सिंह, दिव्यांशु मिश्रा पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ उसके घर पहुंचे। पीड़ित परिवार के साथ यह सब नेता एफआईआर दर्ज कराने के लिए रंगनाथ थाने पहुंचे। इस दौरान जीतू पटवारी के साथ 10 वकील भी मौजूद थे, इसके बाद भी करीब 5 घंटे शिकायत दर्ज कराने में लगे। हालांकि, कटनी पुलिस एफआईआर नहीं लिखी, पुलिस ने लिखित शिकायत के आधार पर अपने रजिस्टर में रोज-नामचा दर्ज करते हुए ऑनलाइन आवेदन लिखा और आगे की जांच के लिए डायरी जीआरपी थाने भेजने की बात कही है।
जीतू पटवारी ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया से बात करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा राज में दलित होना गुनाह है। यह घटना साबित करती है कि भाजपा की विचारधारा बाबा साहब आंबेडकर की विचारधारा के खिलाफ है। इस बात को मोहन सरकार के प्रशासन और मंत्रालय ने प्रमाणित किया है। कटनी पुलिस को लिखित आवेदन लेने में 5 घंटे लग गए, लेकिन मैंने भी कह दिया था या तो मुझे गिरफ्तार करो या फिर एफआईआर करो। न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ता है, हम दलित परिवार के साथ हैं। टीआई समेत 6 पुलिसकर्मी निलंबित हुए हैं और जांच शुरू हो गई। अगर, हमें उनके लिए हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट भी जाना पड़ा तो हम तैयार हैं। हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाकर कर रहेंगे।