विवेचना में क्या सामने आया?
विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और बयानों के आधार पर पुलिस ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 12 और 13 भी बढ़ाई हैं। इन धाराओं के जुड़ने के बाद जांच का दायरा रिश्वत, भ्रष्टाचार और लोक सेवक द्वारा आपराधिक दुराचार से जुड़े पहलुओं तक पहुंच गया है।
FIR दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना ASP अंजना तिवारी को सौंपी गई। पुलिस के मुताबिक FIR की जानकारी सामने आने के बाद नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपी भूमिगत हो गए। इसके बाद पूरे मामले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आठ सदस्यीय SIT का गठन किया गया। अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना को देखते हुए तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया के कार्यालय को भी सील कर दिया गया।
एसआईटी का फोकस किस बात पर?
अब SIT का फोकस इस बात पर है कि कथित जमीन सौदे में किसकी क्या भूमिका थी, रकम का लेन-देन कैसे हुआ और क्या पुलिस पद का इस्तेमाल किसी पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। SIT जमीन के नामांतरण रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, CCTV फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आरोपों से जुड़े लोगों के बयानों का मिलान कर रही है।
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इसी बीच न्यायालय की अनुमति के बाद हत्या के आरोपी आकाश लोधी और रमेश लोधी के बयान भी दर्ज किए गए हैं। अब इन बयानों का मिलान पहले सामने आए आरोपों और दस्तावेजी साक्ष्यों से किया जाएगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक CCTV फुटेज भी जांच की अहम कड़ी है। इसके जरिए संदिग्धों की आवाजाही और मुलाकातों की टाइमलाइन तैयार की जा रही है।
कटनी एसपी के मुताबिक क्या?
कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा के मुताबिक, जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 12 और 13 को प्रकरण में शामिल किया गया है। यानी अब जांच कथित जमीन सौदे से आगे बढ़कर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोपों तक पहुंच गई है। इधर, नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे की अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को जिला न्यायालय में करीब तीन घंटे तक बहस हुई, लेकिन अदालत ने तत्काल कोई फैसला नहीं सुनाया। मामले में अगली सुनवाई अब 29 अगस्त को होगी।
अब सबकी नजर SIT की जांच पर है। संभावना है कि बुधवार को SIT टीम कटनी पहुंचकर सील किए गए CSP कार्यालय को खोलेगी। कार्यालय में मौजूद फाइलों, रजिस्टरों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। संदिग्ध सामग्री मिलने पर उसे जब्त किया जा सकता है। माना जा रहा है कि कार्यालय से मिलने वाले दस्तावेज इस पूरे मामले की जांच में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।