11.94 करोड़ रुपये के ऑनलाइन गेमिंग और हवाला लेन-देन की जांच में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद कटनी पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए मंगलवार देर शाम कटनी कंप्यूटर्स के मालिक विजय भैरवानी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद उन्हें जिला न्यायालय में पेश किया गया है।
खास बात यह है कि हाईकोर्ट ने इसी मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि करोड़ों रुपये के लेन-देन के बावजूद कटनी कंप्यूटर्स के मालिक का बयान क्यों नहीं लिया गया और जिन कर्मचारियों के खातों में रकम पहुंची, उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई। अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस विजय भैरवानी से पूरे मनी ट्रेल और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े लेन-देन को लेकर पूछताछ कर रही है।
कर्मचारी के नाम पर फर्म खोलने का आरोप
दरअसल, पूरा मामला कटनी कोतवाली के अपराध क्रमांक 316/2026 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ओमप्रकाश कटनी कंप्यूटर्स में करीब छह साल से कर्मचारी था। आरोप है कि फर्म में काम करने वाले लेखाकार हिमांशु ने ओमप्रकाश को ‘कटनी कॉम्प’ नाम से फर्म खोलने का झांसा देकर उसके आधार, पैन और खाली हस्ताक्षर वाले चेक ले लिए। इसके बाद उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया गया, जिसका इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग के पैसों के लेन-देन में किए जाने का आरोप है। इसी मामले में हिमांशु के मेमोरेंडम के आधार पर योगेश बजाज को आरोपी बनाया गया था। योगेश 17 अप्रैल 2026 से न्यायिक हिरासत में था।
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान उसके वकील ने कोर्ट में दावा किया कि ऑनलाइन गेमिंग से आया एक भी रुपया योगेश बजाज या हिमांशु के खाते में नहीं पहुंचा। वहीं, बैंक रिकॉर्ड में करीब 11.94 करोड़ रुपये का लेन-देन कटनी कंप्यूटर्स, उसके मालिक विजय भैरवानी और कर्मचारियों के खातों में सामने आया है।
हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर उठाए सवाल
आपको बता दें, यही बिंदु हाईकोर्ट की नाराजगी की बड़ी वजह बना। 13 अगस्त 2026 को कोर्ट ने कोतवाली टीआई राखी पांडे और जांच अधिकारी किशोर द्विवेदी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। कोर्ट के सामने पुलिस की जांच में यह सामने आया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद विजय भैरवानी के खातों में हुए लेन-देन की जानकारी सामने आई और इसके बाद 27 जून को BNSS की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच की अनुमति मांगी गई।
हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब बैंक रिकॉर्ड जांच एजेंसी के पास मौजूद थे, तो चार्जशीट दाखिल करने से पहले विजय भैरवानी का बयान क्यों नहीं लिया गया? उन कर्मचारियों से पूछताछ क्यों नहीं हुई, जिनके खातों में बड़ी रकम पहुंची थी? कोर्ट ने इस चूक को केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि धन के लेन-देन से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू माना है।
50 लाख के हिसाब पर भी उठे सवाल
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि जांच की इस खामी के चलते इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता कि महत्वपूर्ण भूमिका वाले व्यक्ति जांच के दायरे से बाहर रह गए हों। कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ जांच सुनिश्चित करने के लिए आदेश की कॉपी पुलिस महानिदेशक को भेजने के निर्देश दिए थे। पुलिस के मुताबिक, 11.94 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल मामले में हिमांशु सोनवानी, योगेश मूलचंदानी और योगेश बजाज के बाद अब विजय भैरवानी की गिरफ्तारी हुई है। यह चौथी गिरफ्तारी है, जिसे पूरे मामले की जांच में अहम कदम माना जा रहा है।
कटनी पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के मुताबिक, 11.94 करोड़ रुपये के लेन-देन की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। पुलिस पूछताछ में आरोपी विजय भैरवानी 50 लाख रुपये के लेखा-जोखा का हिसाब नहीं दे सके हैं। पूरी कड़ी, बैंक खातों की भूमिका और ऑनलाइन गेमिंग के कनेक्शन को लेकर कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। इस मामले को लेकर ईडी से भी पत्राचार किया जाएगा।