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दिल्ली पीजी हादसा: जान गंवाने वाले अक्षत का पार्थिव शरीर पहुंचा कटनी, इकलौते बेटे को देख बिलख पड़े माता-पिता

Tue, 08 Sep 2026 09:56 AM IST
कटनी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी

सार

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे में जान गंवाने वाले कटनी निवासी 19 वर्षीय छात्र अक्षत यादव का पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह कटनी पहुंचा। इकलौते बेटे का शव घर पहुंचते ही माता-पिता और परिजन बिलख पड़े।
 
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रोते-बिलखते परिजन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस स्थित सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे में जान गंवाने वाले कटनी के 19 वर्षीय छात्र अक्षत यादव का पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह करीब 7 बजे उनके गृह नगर पहुंचा। जैसे ही एंबुलेंस घर के बाहर रुकी, परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। माता-पिता अपने इकलौते बेटे के पार्थिव शरीर से लिपटकर बिलख पड़े। रिश्तेदार, पड़ोसी और परिचित बड़ी संख्या में घर पहुंचे और शोकाकुल परिवार को सांत्वना देते नजर आए। पूरे इलाके में मातम पसरा रहा।
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यूपीएससी क्रैक करके देश की सेवा की करना चाहता था अक्षत
अक्षत की असमय मौत से उसके स्कूल परिवार में भी गहरा शोक है। डीएसपी स्कूल की प्रिंसिपल सीमा दुबे ने बताया कि अक्षत शुरू से ही उनके विद्यालय का मेधावी और अनुशासित छात्र था। पढ़ाई के साथ-साथ उसका व्यवहार भी बेहद सरल और विनम्र था। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अक्षत अक्सर उनसे कहता था कि वह यूपीएससी परीक्षा पास कर देश की सेवा करना चाहता है, लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने उसके सभी सपनों को अधूरा छोड़ दिया। परिवार के साथ दिल्ली गए पूर्व पार्षद डब्बू रजक ने बताया कि अक्षत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। वह सत्य निकेतन स्थित एक पीजी में रहकर दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम ऑनर्स की पढ़ाई कर रहा था। रात करीब डेढ़ बजे हादसे की सूचना मिलते ही पूरा परिवार सदमे में आ गया। उस समय अक्षत के पिता राजस्थान के कोटा में थे। सूचना मिलते ही वे सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

हादसे के बाद का मंजर बेहद दर्दनाक था
डब्बू रजक ने बताया कि वे भी परिवार के साथ दिल्ली में मौजूद रहे, जहां हादसे के बाद का मंजर बेहद दर्दनाक था। उन्होंने बताया कि हादसे में 12 लोग प्रभावित हुए, जिनमें से 11 की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने हरसंभव सहयोग किया। कटनी जिला प्रशासन भी लगातार परिवार के संपर्क में रहा और पार्थिव शरीर को सुरक्षित कटनी पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में मदद की।
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अक्षत की मौत ने सिर्फ उसके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे कटनी शहर को झकझोर दिया है। एक होनहार छात्र, जिसने देश की सेवा का सपना देखा था, वह एक दर्दनाक हादसे की भेंट चढ़ गया। अब हर आंख नम है और हर जुबान पर बस यही सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही की कीमत एक उज्ज्वल भविष्य को क्यों चुकानी पड़ी।

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पिता मानता सिंह यादव ने कहा, "घर का इकलौता बेटा था। दिल्ली में रहकर पढ़ाई करता था। हादसे की जानकारी मिलने पर हम लोग पहुंचे। हमारे मौसिया जी वहीं रहते थे, जिनकी मदद से बच्चे की तलाश की। बच्चा एम्स में मिला और कपड़ों से उसकी पहचान हुई। वह B.Com की पढ़ाई के साथ यूपीएससी की तैयारी कर रहा था, लेकिन अब कुछ भी नहीं रहा।"
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