कटनी से पेंड्रा रोड के बीच बिछेगी चौथी रेल लाइन
- फोटो : Freepik
कटनी से पेंड्रा रोड के बीच 201.37 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन बिछाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। केंद्र सरकार से इस परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे ने भूमि अधिग्रहण के काम को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। लगभग 2,975 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने से ट्रेनों के समयपालन में व्यापक सुधार होगा और नया रेल ट्रैक मिलने से मालगाड़ियों के साथ-साथ यात्री ट्रेनों के संचालन को भी बड़ी राहत मिलेगी।
ये भी पढ़ें-
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति में सीपीसीटी से छूट, 45 वर्ष की उम्र वालों को राहत
भूमि अधिग्रहण और सर्वे की प्रक्रिया
रेलवे प्रशासन मध्य प्रदेश के कटनी सहित उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुट गया है। हाल ही में जारी अधिसूचना के तहत संबंधित अधिकारियों को अधिग्रहण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में भूमि अधिग्रहण के कार्य के लिए एसडीएम को नियुक्त किया गया है। रेलवे एक विस्तृत सर्वे कराकर यह पता लगाएगा कि विभिन्न गांवों में किस किसान की कितनी निजी जमीन इस परियोजना के दायरे में आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की जमीन ही कई परिवारों की आजीविका का मुख्य जरिया होती है, इसलिए अधिग्रहित होने वाली जमीन के रकबे और मिलने वाले मुआवजे को लेकर स्थानीय जमीन मालिकों की नजरें टिकी हुई हैं।
केंद्र सरकार की स्वीकृति और बजट
केंद्र सरकार ने 9 सितंबर 2026 को कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन सहित तीन प्रमुख रेल परियोजनाओं को अपनी मंजूरी प्रदान की थी। इन तीनों रेल परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है। इसमें से केवल कटनी-पेंड्रा रोड की चौथी लाइन परियोजना पर ही लगभग 2,975 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। चौथी रेल लाइन के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद इस पूरे मार्ग पर ट्रेनों के सुगम संचालन के लिए एक अतिरिक्त रेल ट्रैक उपलब्ध हो जाएगा, जिससे रेल यातायात सुचारू रूप से चल सकेगा।
यात्री सुविधाओं और मालगाड़ियों का विस्तार
चौथी रेल लाइन का निर्माण होने से इस पूरे रेलखंड पर लगातार बढ़ रहे कोयला मालगाड़ियों के दबाव को आसानी से निकाला जा सकेगा। अतिरिक्त ट्रैक की सुविधा मिलने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों के ही बेहतर संचालन के लिए ज्यादा क्षमता हासिल होगी। इससे ट्रेनों को एक दूसरे के लिए रास्ता देने में होने वाली देरी और अनावश्यक ठहराव में कमी आएगी। कटनी से बिलासपुर, अनूपपुर, शहडोल और छत्तीसगढ़ की ओर यात्रा करने वाले लोगों को बेहतर परिचालन का सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा ट्रैक क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की समयबद्धता बेहतर होगी, नई यात्री ट्रेनें शुरू करने और मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने का रास्ता भी खुलेगा।