जब मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 10 अप्रैल को लोकसभा सीट का मतदान हो रहा होगा तब कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ यहां से अपना दसवां चुनाव लड़ रहे होंगे।
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एक को छोड़कर सभी चुनावों में अपराजेय रहे कमलनाथ शायद इसीलिए हर भाषण में बता रहे हैं कि 34 साल पहले वह छिंदवाड़ा आए थे, तब यहां क्या था और अब क्या है।
छिंदवाड़ा ने भी कमलनाथ को आठ बार लोकसभा भेजा। एक बार उनकी पत्नी अलकानाथ को 1996 में लोकसभा भेजा जब कमलनाथ हवाला डायरी के पन्नों के कारण चुनाव नहीं लड़ सके थे।
जाहिर है कि उन्होंने हार मान ली है
कमलनाथ अपनी अपराजेय किस्म की छवि के बाद भी सरकारी मशीनरी के प्रति संशंकित हैं। चुनाव आयोग ने उनकी शिकायत पर कलेक्टर और दूसरे कई अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं।
भाजपा इसे कमलनाथ का डर बता रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जिस तरह से कमलनाथ प्रशासनिक मशीनरी को दोष दे रहे हैं, जाहिर है कि उन्होंने हार मान ली है।
विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा संसदीय सीट में आने वाली सात विधानसभाओं में से चार में भाजपा ने जीत हासिल की है। छिंदवाड़ा विधानसभा सीट पर भी उनके खास समर्थक को जिताने में कमलनाथ सफल नहीं रहे थे। भाजपा के आत्मविश्वास का एक कारण यह भी है। चार विधानसभाओं में भाजपा की उपस्थिति कमलनाथ की चिंताएं बढ़ा रही है।
कमलनाथ को हराना आसान नहीं
अलबत्ता हर कोई जानता है कि छिंदवाड़ा में कमलनाथ को हराना आसान नहीं। कमलनाथ 1980 में छिंदवाड़ा इंदिरा गांधी की उंगली पकड़कर आए थे। और 67 वर्ष के कमलनाथ ने अपनी उम्र के 34 साल छिंदवाड़ा के बारे में सोचते हुए बिताए हैं।
जहां 1980 में छिंदवाड़ा उनके लिए एकदम नई जगह था, अब उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। उस समय कोलकाता के उद्योगपति के तौर पर उनकी एंट्री किसी बालीवुड फिल्म जैसी थी। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के चौधरी चंद्रभान सिंह किसान हैं, जो 23 साल पहले कमलनाथ के मुकाबले चुनाव लड़ चुके हैं।
इन 34 वर्षों के बाद छिंदवाड़ा में जहां कमलनाथ के एकाधिकार के विरुद्ध स्वर भी हैं, वहीं छिंदवाड़ा की शक्ल बदल देने का श्रेय देने वाले भी हैं। कमलनाथ खुद गिनाते हैं, ‘छिंदवाड़ा में एक जमाने में हल से खेती होती थी। ट्रेक्टर तक नहीं थे। जब मैंने सोयाबीन की खेती यहां शुरू करवाई उसके बाद किसानों के हालात बदले और अब ट्रेक्टर ही ट्रेक्टर हैं।’ कमलनाथ ने इस इलाके में एक सोयाबीन प्लांट की स्थापना भी तिलहन संघ से करवाई थी लेकिन वह पर्याप्त सोयाबीन नहीं मिलने के कारण बंद हो गया था।
छिंदवाड़ा अपने आप में एक द्वीप भी है और..
कमलनाथ के सांसद रहते छिंदवाड़ा से गुजरती चौड़ी और शानदार सड़कें इस छोटे से आदिवासी कस्बे को जहां दिल्ली की तरफ ले जाती हैं, वहीं पांढुर्णा और रेलवे मार्ग इसे नागपुर व महाराष्ट्र से जोड़ता है।
छिंदवाड़ा अपने आप में एक द्वीप भी है और मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र का बफर-स्टेट भी। केंद्र में जब भी कांग्रेस की सरकारें रहीं, कमलनाथ के पास अच्छे मंत्रालय रहे। उसका फायदा छिंदवाड़ा को मिलता रहा है। लेकिन कमलनाथ के लिए आदिवासियों का समर्थन सबसे महत्वपूर्ण रहा है। छिंदवाड़ा सीट में आने वाली विधानसभाओं में से तीन जुन्नारदेव, अमरवाड़ा और पांढुर्णा जनजाति सीटें हैं। परासिया अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है।
दोध्रुवीय संघर्षः मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है। 2009 में कमलनाथ को 49 फीसदी से भी ज्यादा मत मिले थे। करीब 11.50 लाख मतदाताओं की इस सीट पर चंद्रभानसिंह वर्तमान विधायक हैं। चंद्रभान सिंह पांच बार विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद तीन बार जीत हासिल कर चुके हैं। वे 2003 में उमा भारती के मंत्रिमंडल में मंत्री थे।
कमलनाथ पक्ष मेः
1. नौ लोकसभा में से आठ चुनाव जीते, अपराजेय किस्म की छवि 2. विकास के अनेक काम किए, सड़कें, रेल, शिक्षा संस्थान आदि 3. संसदीय क्षेत्र में सक्रियता और आदिवासियों का समर्थन
1.लगातार चुनाव जीतने से एंटी-इनकंबेंसी 2.केंद्र सरकार और कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इनकंविरुद्धः 1.लगातार चुनाव जीतने से एंटी-इनकंबेंसी 2.केंद्र सरकार और कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी 3.छिंदवाड़ा लोकसभा की सात विधानसभा सीटों में से चार भाजपा ने जीती 4.छिंदवाड़ा विधानसभा पर भी कमलनाथ के खास समर्थक हारे 5.विरोधी उम्मीदवार चौधरी चंद्रभानसिंह भी हाल ही में जीते विधायक बेंसी 3.छिंदवाड़ा लोकसभा की सात विधानसभा सीटों में से चार भाजपा ने जीती 4.छिंदवाड़ा विधानसभा पर भी कमलनाथ के खास समर्थक हारे 5.विरोधी उम्मीदवार चौधरी चंद्रभानसिंह भी हाल ही में जीते विधायक