मध्यप्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी ने बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य की कमान वरिष्ठ नेता कमलनाथ के हाथों में सौंपी हैं। कमलनाथ के प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने के बाद एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने घोषणा की है कि वह पूरे प्रदेश में प्रस्तावित अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भगवान राम की भूमि ओरछा से करेंगे। 15 मई से वह मध्यप्रदेश के निर्वाचन क्षेत्रों की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह सभी 230 निर्वाचन क्षेत्र जाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि दिग्विजय की प्रस्तावित यात्रा को दोस्त कमलनाथ की मदद करने के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस यात्रा के जरिए लोगों से कनेक्ट करने की कोशिश की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि सिंह ने ही मध्यप्रदेश के अध्यक्ष पद के लिए कमलनाथ का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को सुझाया था।
प्रदेश अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद कमलनाथ पहली बार 1 मई को भोपाल पहुंचेंगे। जिसके बाद 1 से 4 मई तक वह प्रदेश के विभिन्न शहरों का दौरा करेंगे। इसी दौरान वह उज्जैन के
महाकाल और दतिया की मां पीतांबरा पीठ के दर्शन भी करेंगे और फिर वापस भोपाल आ जाएंगे। दिल्ली से विशेष विमान के जरिए 1 मई को कमलनाथ भोपाल पहुंचेंगे।
वहीं राजनीतिक गलियारों में यह हलचल थी कि कमलनाथ को इसलिए अध्यक्ष बनाया गया है कि चुनाव जीतने पर उन्हें मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जा सके। इसपर कमलनाथ ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें सीएम पद की भूख नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने महसूस किया कि वह सबको साथ लेकर चल सकते हैं। मैं मुख्यमंत्री पद या किसी और दूसरे पद का भूखा नहीं हूं। मैं बस भाजपा सरकार के दलदल से राज्य को बाहर निकालने का भूखा हूं।