कुर्सी जाने की टीस कोई चाहे तो मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से पूछ ले। उनके दिमाग में बस भाजपाई बने ज्योतिरादित्य सिंधिया से राजनीतिक बदला लेने का भूत सवार है। कमलनाथ भाजपा और सिंधिया से उपचुनाव में ही इस हिसाब-किताब को पूरा कर लेना चाहते हैं। इसके लिए टीम कमलनाथ सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। यहां तक कि चुनाव प्रचार अभियान के प्रमुख रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भी मदद ले सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए प्रशांत किशोर और कमलनाथ की बातचीत अंतिम दौर में हैं।
कांग्रेस से भाजपा में गए आदिवासी नेता प्रेमचंद गुड्डू वहां बागी हो चुके हैं। गुड्डू कांग्रेस पार्टी में शामिल होकर उपचुनाव में भाजपा की नाव डुबोने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा के कुछ और नेताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा का रक्तचाप बढ़ाना शुरू कर दिया है। ज्योतिरादित्य समर्थक ग्वालियर चंबल संभाग के विधायक टिकट को लेकर आश्वस्त हैं, लेकिन क्षेत्र में जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर लॉकडाऊन के दौरान भी सक्रिय हैं। सभी 22 विधायकों को टिकट मिलने का भरोसा है। वहीं सभी उपचुनाव की 24 सीटों पर कांग्रेस के लिए चुनौती बनने वाले भाजपा नेताओं की पेशानी पर इसको लेकर बल है। कांग्रेस को लग रहा है कि यही स्थितियां उसके लिए नफे वाली साबित हो सकती है।