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चाणक्य दिग्विजय सिंह ने दिखाई अपनी हैसियत, कमल को मिला ताज

Thu, 13 Dec 2018 11:37 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजनीति के चाणक्य दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर अपनी प्रबंधन कला दिखाई है। मध्यप्रदेश और भोपाल को भरपूर समय देकर दिग्विजय ने जो चाहा वह किया। उन्होंने म.प्र. के निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एजेंडे को फेल करने के लिए न केवल नर्मदा यात्रा की, बल्कि 20 बागी प्रत्याशियों का नामांकन वापस कराया। कहा जा रहा है कि पर्दे के पीछे रहकर कमलनाथ को मुख्यमंत्री का ताज दिलाने में दिग्विजय सिंह की अहम भूमका रही है। 

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गुरुवार 13 दिसंबर को जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बुलावे पर प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया दिल्ली आए तो दिग्विजय ने भोपाल से हिलना जरूरी नहीं समझा। वह विधायकों से मिलते जुलते रहे। बताते हैं वह पर्दे के पीछे से लगातार सक्रिय रहे। दिग्विजय के एक करीबी की माने तो वह सुबह से ही आश्वस्त थे कि म.प्र. का ताज कमलनाथ को मिलने वाला है।

हिचक रहे थे ज्योतिरादित्य

ज्योतिरादित्य की असली हिचक दिग्विजय को लेकर ही थी। ज्योतिरादित्य को पहले से ही दिग्विजय को लेकर आशंका थी कि वह उनके रास्ते का रोड़ा बनेंगे। चुनाव में टिकट बंटवारे के दौरान भी दोनों नेताओं का विवाद सतह पर आ गया था। हालांकि दिग्विजय सिंह ने इसके बाद अपनी छवि को स्थापित करने में काफी अहम भूमिका निभाई।
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बताते हैं टिकट वितरण में दिग्विजय सिंह ने न केवल अपनी महत्वाकांक्षा को पीछे खींचा, बल्कि नाराज टिकट के इच्छुक कांग्रेसियों को मनाया। कमलनाथ के साथ लगातार तालमेल बनाए रखा। चुनाव में मतगणना के दौरान जटिल स्थिति आने पर कमलनाथ ने उनसे सरकार बनाने की संभावना तलाशने में सहयोग मांगा था। दिग्विजय के बारे में यह सर्वविदित तथ्य है कि उनका कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से काफी करीब का रिश्ता है। 

मंत्रिपरिषद का बंटवारा भी काफी अहम

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के चयन का मामला भले सुलझ गया हो, लेकिन मंत्रिपरिषद के गठन का मामला भी अग्निपरीक्षा बन सकता है। मंत्रियों और उनके विभाग के बंटवारे को लेकर दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया में समीकरण उलझ सकता है। हालांकि कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंत्रियों की संख्या और उनके विभाग के बंटवारे को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को आश्वस्त किया है। बताते हैं इसके बारे में कमलनाथ ने भी अपनी सहमति जताई है, लेकिन इसके बाद भी गणित उलझने के पूरे आसार हैं।

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