कबीर जयंति के मौके पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में सोमवार को व्याख्यान आयोजित किया गया। कबीर निर्गुण भक्ति धारा की ज्ञानमार्गीय शाखा के प्रमुख संत कवि थे।
इस आयोजन में कबीर के वैचारिक दर्शन पर विमर्श सहित वरिष्ठ साहित्यकार व पूर्व प्राचार्य उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश शासन डॉ. प्रकाश उपाध्याय का "मानवीय मूल्यों के प्रखर प्रवक्ता कबीर" विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। डॉ. उपाध्याय ने कबीर की विविध उक्तियों को उध्दृत करते हुए उनके दर्शन में मानवीय मूल्यों की विस्तृत विवेचना की।
डॉ. उपाध्याय ने कहा, "कबीर की कविता "आँखों देखी सच्चाई" है, पोथियों के पन्नों में लिखी हुई बात नहीं। वे मूल्य जो मनुष्यता की परिभाषा तय करते हैं, वे कबीर के दर्शन में व्यावहारिक रूप में उपलब्ध होते हैं। कबीर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने जिन जिन मूल्यों और ऊसूलों की बात की उन्हें सर्वप्रथम स्वयं के आचरणों में उतारा, यही कारण है कि उनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं दिखाई देता। कबीर कालजयी कवि हैं, वे कल भी प्रासंगिक थे, आज भी हैं और आनेवाले समय में भी प्रासंगिक रहेंगे।"
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि कबीर शील, सादगी और साधुता की त्रिवेणी थे। उन्होंने बताया कि कबीर का स्वर मानवता का प्रतिनिधि स्वर है। वे मानवीय मूल्यों के प्रखर प्रवक्ता हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया।
कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, विभागाध्यक्ष, जनपद संपदा - प्रोफेसर मौली कौशल, वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश उपाध्याय सहित मीडिया जगत से जुड़े अनेक पत्रकार और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध श्रोता मौजूद थे। कार्यक्रम के आखिर में अभय मिश्रा ने सभी का आभार जताया।