मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर्स स्टायपेंड में देरी होने से नाराज हैं, जिसके चलते चिकित्सा छात्रों ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा है।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि हर महीने की पहली तारीख को मिलने वाला स्टायपेंड दो महीने देर से मिल रहा है, जिसकी शिकायत डीन से लेकर डीएमई और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग से भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक इस मुद्दे का कोई समाधान नहीं हुआ।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन भोपाल के अध्यक्ष डॉ.अमित टांडिया के अनुसार नवंबर महीने का स्टायपेंड जनवरी में मिला है। जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, स्टायपेंड देर से मिलने के कारण उन्हें गुजारा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि संभागायुक्त, डीएमई, डीन से लेकर विभाग के अधिकारी फंड की कमी का हवाला देकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं।
वहीं, पीजी की काउंसलिंग न होने के चलते अब तक जूडा का नया बैच नहीं आया है, जिसके चलते जूनियर डॉक्टर्स को ओवर टाइम करना पड़ रहा है। डॉ. टांडिया ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री सारंग और विभागीय अफसरों से इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है।
स्टायपेंड के रूप में हर महीने जूडा को मिलने वाली राशि
डिप्लोमा व पीजी प्रथम वर्ष 65 हजार
डिप्लोमा व पीजी द्वितीय वर्ष 67 हजार
पीजी तृतीय वर्ष 69 हजार
इंटर्न 12 हजार
सुपर स्पेशलिटी फर्स्ट ईयर 69 हजार
सुपर स्पेशलिटी सेकंड ईयर 69 हजार
सुपर स्पेशलिटी थर्ड ईयर 69 हजार
सीनियर रेसीडेंट 76 हजार
जूनियर रेसीडेंट 55 हजार