वक्फ बोर्ड की कृषि भूमि पट्टे में देने के लिए बुलाई गई नीलामी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के विवेक अग्रवाल व विवेक जैन की युगलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि बोर्ड के अधिकार पर रोक नहीं लगाई जा सकती है।
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अमीर आजाद अंसारी सहित अन्य की तरफ से दायर याचिका में मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड भोपाल द्वारा वक्फ कृषि भूमि के पट्टे-अधिकारों की नीलामी के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि नोटिस मुख्य कार्यकारी अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी किया गया। जो पूर्णकालिक सीईओ नहीं हैं और उनके द्वारा इस प्रकार का नोटिस जारी करना वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 23 का उल्लंघन है। धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार नीलामी केवल मुतवल्ली द्वारा की जा सकती है।
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युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि डॉ. फरजाना ग़ज़ल, प्रोफेसर (उर्दू) शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय भोपाल को प्रतिनियुक्ति पर उच्च शिक्षा विभाग से पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पदस्थ किया गया है। इसके बाद उन्हें बोर्ड के सीईओ का दायित्व दिया गया है। अस्थायी शब्द को कुछ समय के परिप्रेक्ष्य में पढ़ा जाता है। इसका अर्थ प्रतिनियुक्ति की अवधि होता है, जिसका कार्यकाल तीन साल का रहता है। डॉ. फरजाना ग़ज़ल एक मुस्लिम होने के साथ-साथ एक राजपत्रित अधिकारी भी हैं, जो राज्य सरकार के उप सचिव के पद के बराबर हैं। प्रतिनियुक्ति के कारण उन्हें पूर्णकालिक सीईओ नहीं कहा जा सकता है। वक्फ संपत्ति पट्टा नियम, 2014 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। 2014 के नियम 4 में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि एक मुतवल्ली या बोर्ड वक्फ संपत्तियों को पट्टे पर दे सकता है। मुतवल्ली के अनन्य डोमेन को मुतवल्ली या बोर्ड से बदल दिया गया है। बोर्ड द्वारा अधिकार के प्रयोग पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती है। युगलपीठ ने याचिका आधारहीन मानते हुए उसे खारिज कर दिया।