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हाईकोर्ट: कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघ बन जाता है गाय, बाघों की मौत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई

Mon, 26 Oct 2026 09:19 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की संदिग्ध मौतों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को मौतों की वजह बताया गया है। हाईकोर्ट ने सितंबर-अक्टूबर में मरे दो बाघों की मौत के कारणों की रिपोर्ट और केंद्र से फंड कटौती पर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। 
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कान्हा नेशनल पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस 'सीडीवी' से बाघों की मौत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। सोमवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विवेक जैन को  याचिकाकर्ता के वकील अंशुमान सिंह ने बताया कि वायरस के प्रभाव से बाघ अपनी आक्रामक तथा शिकार करने की वास्तविक प्रवृत्ति को छोडकर सीधी-साधी गाय बन जाता है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए विगत दिनों हुए दो बाघों की मौत के कारणों की रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए हैं। अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। 
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मुंबई के चेंबूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की तरफ से दायर याचिका में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत हो चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में अप्रैल व मई माह में आठ बाघों की मौत हुई है। मौतों से पहले उनकी शारीरिक स्थिति में स्पष्ट गिरावट देखी गई। इन मौतों का कारण संदिग्ध कैनाइन डिस्टेंपर वायरस माना गया है। याचिका में राहत चाही गई है कि केंद्र व राज्य सरकार को बाघों की सुरक्षा के लिए निवारक और उपचारात्मक उपायों करने के निर्देश जारी किए थे। इसके अलावा कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए कुत्तों को क्वारंटीन करने व उनका टीकाकरण करने के निर्देश जारी किए थे। पूर्व में हुई याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश के टाइगर रिजर्व को पर्याप्त फंड नहीं उपलब्ध कराने तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद रिक्त पदों में नियुक्ति नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया था। युगलपीठ ने प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए कुत्तों के टीकाकरण तथा फंड के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे।
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याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि कान्हा में अभी तक 20 बाघों की मौत संदिग्ध तौर पर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई है। पांच बाघों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण वायरस था। इसमें से दो टाइगर को क्वारंटीन कर उपचार के लिए रिजर्व के मुक्की हेल्थ सेंटर में रखा गया था। वायरस हवा में नहीं फैलता है। इसके फैलने का कारण कुत्ते व सामूहिक जल स्त्रोत है। जहां वन्य प्राणी पानी पीने के लिए आते हैं।

युगलपीठ को बताया गया कि साल 2016 के प्रदेश के टाइगर रिजर्व को केंद्र सरकार की तरफ से 12 हजार लाख रुपये का फंड दिया गया था। इस साल फंड को घटाकर एक चौथाई कर दिया गया है और सिर्फ तीन हजार लाख रुपये दिए गए हैं। प्रदेश सरकार की तरफ से बताया गया कि वायरस की रोकथाम के लिए कान्हा सहित प्रदेश में स्थित अन्य टाइगर रिजर्व में समीप कुत्तों का टीकाकरण किया गया है।
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युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि सितंबर तथा अक्तूबर माह में हुई दो बाघों की मौत के कारणों की रिपोर्ट पेश की जाए। इसके अलावा केंद्र सरकार को फंड में कटौती के संबंध में जवाब पेश करने के आदेश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह तथा अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने पैरवी की।
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