मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
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मप्र हाईकोर्ट में बाल कल्याण समिति की निगरानी में रहने वाली नाबालिग की कस्टडी सौंपने के लिए फूफा की सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच रिपोर्ट पेश की गई। हाईकोर्ट जस्टिस एके सिंह तथा जस्टिस अमित सेठ की युगलपीठ ने रिपोर्ट की प्रति सरकारी अधिवक्ता को उपलब्ध कराने के आदेश जारी करते हुए आपत्ति पेश करने एक सप्ताह का समय प्रदान किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की गई है।
बता दें कि रतलाम निवासी कालूराम की तरफ से हाईकोर्ट को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि कोर्ट के आदेश पर उसकी नाबालिग बच्ची को बाल कल्याण समिति भेज दिया गया है। जब वह अपनी बच्ची से मिलने गया तो वह नहीं मिली। कालूराम ने आरोप लगाया कि उसकी बच्ची को बेच दिया गया है। आरोप को गंभीरता से लेते हुए चीफ जस्टिस के निर्देश पर इस पत्र की याचिका के रूप में सुनवाई के आदेश जारी किए थे। युगलपीठ ने पत्र याचिका के रूप में मामले की सुनवाई करते हुए नाबालिग को कोर्ट में पेश करने के आदेश जारी किए थे।
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पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि नाबालिग बाल कल्याण समिति में नहीं जाना चाहती और वह अपने फूफा के साथ जाना चाहती है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि फूफा प्राकृतिक संरक्षक नहीं है, इसलिए उसकी पृष्ठभूमि को जाने बिना नाबालिग को नहीं सौंप सकते। युगलपीठ ने नाबालिग को पुनः बाल कल्याण समिति भेजने के आदेश जारी करते हुए फूफा की आर्थिक व पारिवारिक पृष्ठभूमि के संबंध में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से फूफा की आर्थिक व पारिवारिक पृष्ठभूमि की रिपोर्ट पेश की गई। युगलपीठ ने रिपोर्ट के प्रति सरकारी अधिवक्ता को प्रदान करने के आदेश जारी करते हुए अपने आदेश में कहा है कि वह अवलोकन कर अपनी आपत्ति पेश कर सकते हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की गई है।