नाले के जहरीले पानी से सब्जी के खेती किए जाने के संबंध में हाईकोर्ट ने मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझाव पर अमल करते हुए कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 17 फरवरी को निर्धारित की है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक विधि छात्र द्वारा पत्र लिखकर बताया गया था कि जबलपुर के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को नाले के दूषित पानी का उपयोग की सब्जी की खेती होती है। ऐसी सब्जी का उपयोग मानव जीवन के लिए खतरनाक है। चीफ जस्टिस ने पत्र की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किए थे। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल नाले की पानी की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे।
ये भी पढ़ें-
हाईकोर्ट ने कहा- याचिकाओं को आधार से लिंक करने के सुझाव को प्रशासनिक कमेटी के समक्ष रखा जाए
मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल से तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि नाले के दूषित पानी से उगाई जाने वाली सब्जी मानव जीवन के लिए खतरनाक है। शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिलता है। जिस कारण वह अत्यंत दूषित हो गया है और इसका उपयोग निस्तार और सिंचाई के लिए किया जाना मानव जीवन के लिए खतरनाक है। नालों के पानी में बीओडी, टोटल कोलीफार्म या फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानक सीमा से अधिक है। नमूना रिपोर्ट और जांच से स्पष्ट है कि यह अनुपचारित सीवर का जल है जो पीने, नहाने या खेती सहित किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। खेती के लिए पानी के उपयोग का प्रतिबंधित किया जाए।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। उक्त याचिका के साथ डेमोक्रेटिक लॉयर फोरम की तरफ से दायर याचिका की संयुक्त रूप से सुनवाई हो रही है। याचिका की तरफ से उनकी तरफ से मांग की गई कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझाव पर सही ढंग से कार्य किया जा रहा है। इसके लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी के लिए एक कमेटी गठित की जाए। युगलपीठ ने उक्त आवेदन पर सुनवाई लंबित रखी है।