शराब के रुपये नही देने पर तोड़ दिया था कंधा
शराब पीने के लिए रुपये नहीं देने पर मारपीट कर कंधा फ्रैक्चर करने के मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने कहा कि घायल गवाह का लगातार एक जैसा बयान अत्यंत विश्वसनीय होता है और उसे चश्मदीद गवाह के बयान से कम नहीं आंका जा सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील निरस्त कर दी।
नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा निवासी धनीराम उर्फ कल्लू ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई छह माह के कारावास और जुर्माने की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। प्रकरण के अनुसार, हरिप्रसाद वर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 18 अक्टूबर 2025 को दोपहर में दूधिया नदी में स्नान कर घर लौटते समय आरोपी ने उनका रास्ता रोक लिया और शराब पीने के लिए रुपये मांगे। रुपये देने से इनकार करने पर आरोपी ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनकी कलाई, घुटने, कमर और कंधे में चोटें आईं। एक्स-रे जांच में बाएं कंधे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को छह माह के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
ये भी पढ़ें-
तेज बारिश में दादर और नगर हवेली में फंसे झाबुआ के 70 मजदूर, प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
अपील में तर्क दिया गया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। गवाहों के बयानों में विरोधाभास हैं। शिकायतकर्ता ने अदालत में 2,000 रुपये मांगने की बात कही, जबकि एफआईआर में 200 रुपये का उल्लेख है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने स्वीकार किया कि शिकायतकर्ता नाली में गिर गया था और डॉक्टर ने भी माना कि ऐसी चोटें गिरने से लग सकती हैं।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से घायल के बयान पर आधारित है। हमले के संबंध में उसके बयान लगातार एक जैसे और विश्वसनीय रहे हैं। ऐसे में घायल गवाह के सुसंगत बयान को कमतर नहीं आंका जा सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही मानते हुए अपील खारिज कर दी।