फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट सख्त: कांग्रेस IT सेल कार्यकर्ताओं की हिरासत प्रथम दृष्टया अवैध, भोपाल पुलिस कमिश्नर को जांच के आदेश

Tue, 12 May 2026 09:24 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत माना है। कोर्ट ने पीड़ितों के बयान पुलिस कमिश्नर भोपाल को भेजते हुए शिकायत मानकर कानूनी कार्रवाई करने और तीन माह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जबलपुर। भोपाल पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किए गए कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट की जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत का मामला माना है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट जबलपुर द्वारा दर्ज किए गए पीड़ितों के बयानों की मूल प्रति पुलिस कमिश्नर भोपाल को भेजी जाए। पुलिस कमिश्नर इन बयानों को शिकायत मानकर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल फर्जी पत्र मामले में राजस्थान पुलिस ने मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को भोपाल से गिरफ्तार किया था। युवकों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने के खिलाफ भोपाल निवासी खिजर खान सहित अन्य की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि 20 अप्रैल 2026 की सुबह साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन भोपाल में पुलिस ने तीनों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, लेकिन उन्हें दो दिनों तक किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। बाद में उन्हें राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और बाद में परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने दोबारा सूचना दी कि युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। अगले दिन उन्हें फिर साइबर सेल बुलाकर राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया।

पुलिस ने क्या कहा?

विज्ञापन

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गिरफ्तार किए गए तीनों युवकों और संबंधित थाने की सीसीटीवी फुटेज पेश करने के निर्देश दिए थे। पिछली सुनवाई में तीनों युवकों को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। राजस्थान पुलिस ने दावा किया कि युवकों को अवैध हिरासत में नहीं रखा गया था। उन्हें 22 अप्रैल को गिरफ्तार कर उसी दिन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि युवक मध्य प्रदेश पुलिस अधिकारियों के साथ स्वेच्छा से जयपुर गए थे।

पढे़ं:  बरगी क्रूज हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, तीनों जनहित याचिकाओं का निराकरण; दिए खास निर्देश

हालांकि, तीनों युवकों ने राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के दावों को गलत बताया। इसके बाद युगलपीठ ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जबलपुर को निर्देश दिए कि किसी अधिकारी की नियुक्ति कर तीनों युवकों के अलग-अलग बयान दर्ज कराए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मध्यप्रदेश पुलिस के संपर्क से लेकर जयपुर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने तक वास्तव में क्या हुआ।

कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

विज्ञापन

कोर्ट ने डीआईजी क्राइम जयपुर और डीसीपी क्राइम भोपाल को भी पूरे घटनाक्रम पर शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को हुई सुनवाई में आदेश के पालन में भोपाल क्राइम ब्रांच के सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार शर्मा, राजस्थान पुलिस के एसीपी बलराम चौधरी, एसएचओ संतरा मीणा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित हुए। 29 अप्रैल को सिविल जज जबलपुर द्वारा दर्ज किए गए बयान सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट रजिस्ट्री को सौंपे गए, जिन्हें रिकॉर्ड पर ले लिया गया।

सुनवाई के बाद युगलपीठ ने बयानों की एक प्रति रिकॉर्ड में रखने और मूल प्रति पुलिस कमिश्नर भोपाल को भेजने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बयानों के परीक्षण से प्रथम दृष्टया यह मामला अवैध हिरासत का प्रतीत होता है। पुलिस कमिश्नर भोपाल बयानों को शिकायत मानकर कानून के अनुसार कार्रवाई करें और तीन माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें