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MP News: चेक बाउंस मामले में कंपनी को अनावेदक बनाना जरूरी, हाईकोर्ट ने रद्द की जिला कोर्ट में लंबित कार्यवाही

Sun, 04 Dec 2022 07:07 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

रीवा सीजेएम कोर्ट में एनआई 138 के तहत लंबित कार्यवाही को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने सीजेएम कोर्ट में लंबित कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा है कि एनआई की धारा 41 के तहत कंपनी को आरोपी बनना आवश्यक है।
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(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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रीवा सीजेएम कोर्ट में एनआई 138 के तहत लंबित कार्यवाही को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि उसने कंपनी के नाम का चेक दिया था। हाईकोर्ट जस्टिस डीके पालीवाल की एकलपीठ ने सीजेएम कोर्ट में लंबित कार्यवाही को रद्द करते हुए अपने आदेश में कहा है कि एनआई की धारा 41 के तहत कंपनी को आरोपी बनना आवश्यक है।
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बता दें कि याचिकाकर्ता अनिल कुमार लोहरिया की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि नवभारत बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करता था। अनावेदक रामलाल गुप्ता ने अपने जीवन काल में कंपनी के साथ काम किया था। जिसके एवज में जनवरी 2014 को उसने राम लाल को 3 लाख 40 हजार रुपये का चेक दिया था। खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया था।

अनावेदक ने उसके खिलाफ सीजेएम कोर्ट रीवा में क्रिमिनल कम्पलैंट दायर की है, जो लंबित है। याचिका में कहा गया था कि उसने कंपनी का चेक दिया था, इसलिए कंपनी के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए। एकलपीठ ने अपने आशष में कहा है कि अनावेदक ने इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि याचिकाकर्ता ने किस हैसियत से उसने कंपनी का चेक जारी किया था। एनआई की धारा 41 के तहत चेक बाउंस के मामले में कंपनी को अनावेदक बनना आवश्यक है। एकलपीठ ने लंबित क्रिमिनल कम्पलैंट को रद्द करते हुए अनावेदक के वारिसजनों को उसकी कानूनी कार्यवाही की स्वतंत्रता प्रदान की है।
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