मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के पूर्व निर्देश के पालन में नर्मदा नदी को दूषित होने से बचाने के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से सुझाव पेश किए गए। सुझाव में कहा गया कि नर्मदा में मिलने वाले नालों की पहचान कर एसटीपी लगाए जाएं। उपचारित दूषित जल का कृषि, सिंचाई व औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग को गति दी जाए। हाईकोर्ट ने उक्त सुझावों को रिकॉर्ड पर ले लिया। इसी के साथ सभी पक्षों को युगलपीठ ने सुझावों के संदर्भ में जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की है।
नालों के गंदे व हानिकारक दूषित पानी से सब्जी उगाने के संबंध में लॉ छात्र द्वारा लिखे गए पत्र को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में कर रही है। इसके अलावा नर्मदा में मिलने वाले नालों और संक्रमित पानी की आपूर्ति के संबंध में भी दो अन्य याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने विगत सुनवाई में सभी पक्षों को उक्त समस्याओं के समाधान के लिए ठोस उपाय सुझाने के निर्देश दिए थे।
'पानी पीने, निस्तार और सिंचाई के लिए पूर्णतः अनुपयोगी'
वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने दी ये दलील
डेमोक्रेटिक लायर्स फोरम के सचिव रविंद्र गुप्ता ने दलील दी थी कि शीघ्र ही साफ और बिना संक्रमित पानी पीने योग्य घरों में सप्लाई करने हेतु नगर निगम सक्षम नहीं है, इसलिए संपूर्ण मामले पर सही कार्रवाई के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जानी चाहिए। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की चेयरमैनशिप में जबलपुर मेयर, जबलपुर कमिश्नर, जबलपुर कलेक्टर, पीएचई डिपार्टमेंट के हेड, किसी सीनियर सिटीजन, सोशल वर्कर और किसी सीनियर एडवोकेट को इसमें शामिल किया जाना चाहिए।