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Jabalpur News: पुलिसकर्मी व पूर्व महापौर के बीच हिंसक विवाद के मामले में हाईकोर्ट सख्त, एसटीएफ को सौंपी जांच

Tue, 20 Jan 2026 08:42 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी से बदसलूकी और वर्दी फाड़ने के मामले में नामजद शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बता दें कि पूर्व महापौर और उनके समर्थकों की बदसलूकी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
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विस्तार
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जबलपुर में पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता और वर्दी फाड़ने का वीडियो वायरल होने के बावजूद नामजद कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में निष्पक्ष जांच न होने पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने जांच एसटीएफ जबलपुर को सौंप दी है।

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जबलपुर में पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता और वर्दी फाड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद पूर्व महापौर और उनके समर्थकों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर लार्डगंज थाना प्रभारी दोनों पक्षों की ओर से दर्ज एफआईआर और केस डायरी के साथ न्यायालय में उपस्थित हुए।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ, जिसमें जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ शामिल थे, ने प्रारंभिक सुनवाई में पाया कि दोनों मामलों में निष्पक्ष और सही जांच नहीं की गई है। युगलपीठ ने मामले की जांच एसटीएफ जबलपुर को सौंपने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एसटीएफ को अगली सुनवाई में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।
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जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका में बताया गया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू को लार्डगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत बल्देवबाग के पास वाहन चेकिंग के दौरान बिना हेलमेट वाहन चलाने पर पुलिसकर्मी ने रोका था। आरोप है कि पूर्व महापौर ने अपना परिचय देने के बाद पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता की। इसके बाद उनके समर्थकों की भीड़ एकत्र हो गई और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी गई। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

याचिका में यह भी कहा गया कि राजनीतिक दबाव के चलते आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज नहीं की गई, बल्कि ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी के खिलाफ ही मामला दर्ज कर उसे निलंबित कर दिया गया। पुलिसकर्मी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया, जबकि वायरल वीडियो में आरोपियों की पहचान स्पष्ट बताई गई है।

युगलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता की सुरक्षा कैसे करेंगे। कोर्ट ने लार्डगंज थाना प्रभारी को निर्देशित किया था कि वे अगली सुनवाई में दोनों एफआईआर और केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें। साथ ही पूर्व महापौर और पुलिस अधीक्षक जबलपुर को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया था।
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मंगलवार को हुई सुनवाई में लार्डगंज थाना प्रभारी नवल आर्य दोनों एफआईआर और केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए। युगलपीठ ने अभिलेखों और मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि दोनों मामलों में जांच सही और निष्पक्ष नहीं की गई है। इसके बाद युगलपीठ ने जांच एसटीएफ को सौंपने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 17 फरवरी निर्धारित की है।

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