मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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मध्यप्रदेश के सीधी में आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करने वाले भाजपा नेता के खिलाफ एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस नंदिता दुबे की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण अगले सप्ताह सुनवाई निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता कंचन शुक्ला की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनका पति प्रवेश शुक्ला एक पार्टी का नेता है। पति द्वारा एक आदिवासी युवक पर पेशाब करने का वीडियो वायरल होने के बाद इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया गया। प्रशासन द्वारा भी उसके खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है। याचिका में एनएसए कार्रवाई की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामले को राजनीतिक मुद्दे का रूप दिया गया था। इसके कारण प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की है। एनएसए की कार्रवाई अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया था कि पब्लिक ऑर्डर के तहत आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार द्वारा भी एनएसए की कार्रवाई पर सहमति प्रदान कर दी गई है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला भी दिया गया था। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश जवाब में कहा गया कि वायरल वीडियो साल 2020 का है। तीन साल बाद वीडियो के आधार पर एनएसए की कार्रवाई करना अवैधानिक है। किसी प्रकार के दंगे या विवाद की कोई स्थिति निर्मित नहीं हुई थी। सीएम द्वारा सोशल मीडिया में की गई पोस्ट का हवाला देते हुए कहा गया था कि यह पब्लिक ऑर्डर के तहत नहीं सीएम ऑर्डर के तहत कार्रवाई की गई है। याचिका पर शुक्रवार को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है।