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Jabalpur: 22–25 साल बाद निकाले गए कर्मचारियों को हाईकोर्ट से राहत, बर्खास्तगी का आदेश रद्द

Wed, 04 Feb 2026 10:40 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय जबलपुर में कार्यरत क्लास-3 कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए 22 से 25 साल की सेवा के बाद की गई बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में जिला न्यायालय जबलपुर में काम कर रहे क्लास-3 कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 22 से 25 साल की सेवा के बाद उन्हें नौकरी से निकालने का आदेश रद्द कर दिया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डबल बेंच ने कहा कि साल 1994-95 में हुई ये नियुक्तियां पूरी तरह गैरकानूनी या शुरू से ही बेकार नहीं थीं, बल्कि इनमें सिर्फ प्रक्रिया से जुड़ी कुछ गलतियां थीं, जो इतने लंबे समय तक नौकरी करने के बाद अपने आप खत्म मानी जाएंगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी कर्मचारियों को उनके पदों पर वापस रखा जाए। साथ ही उन्हें बकाया वेतन, पदोन्नति और नौकरी से जुड़े दूसरे सभी फायदे भी दिए जाएं।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से क्या कहा गया
जबलपुर के रहने वाले राजीव काशिव, सुधीर पटेल, मोहम्मद शमीम और अन्य की तरफ से वरिष्ठ वकील मनोज शर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इन सभी की नियुक्ति जिला न्यायालय जबलपुर में क्लास-3 पदों पर हुई थी। ये नियुक्तियां उस समय की सरकार की एक योजना के तहत की गई थीं।
उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ताओं के माता-पिता सरकारी कर्मचारी थे, जिन्होंने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 42 के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। इसके बाद लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए इन लोगों की नियुक्ति की गई थी।
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22 साल बाद क्यों निकाली गई थी नौकरी
बाद में सरकार ने वह योजना वापस ले ली। इसके करीब 22 साल से ज्यादा समय बाद, साल 2017 में मनसुख लाल सराफ बनाम अरुण कुमार तिवारी केस के आधार पर जांच हुई। इसके बाद यह कहकर इन कर्मचारियों की सेवाएं खत्म कर दी गईं कि उनकी नियुक्तियां अनुकंपा नीति और मेडिकल जांच के नियमों के खिलाफ थीं। अब हाईकोर्ट ने इस फैसले को गलत मानते हुए कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है और उनकी नौकरी बहाल करने के आदेश दिए हैं।

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