एमपी हाईकोर्ट ने नगर पालिका परिषद गाडरवारा द्वारा अवैध रूप से जमीन पर कब्जा कर मटन मार्केट स्थापित करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने तीन दिनों में दुकानें हटाने और बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही, संबंधित मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीईओ) के खिलाफ जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
याचिकाकर्ता की शिकायत
गाडरवारा निवासी माखन लाल कोरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनकी एक एकड़ से अधिक निजी भूमि पर नगर पालिका ने अवैध कब्जा कर लिया। फिर वहां मटन मार्केट का निर्माण कर दिया। माखन लाल ने यह भी कहा कि जमीन अधिग्रहण के लिए न तो कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई और न ही उन्हें मुआवजा प्रदान किया गया।
नगर पालिका का पक्ष
याचिका के जवाब में, नगर पालिका ने दावा किया कि खुले में मांस और मटन की बिक्री पर प्रतिबंध के मद्देनजर मटन मार्केट स्थापित करने के लिए जमीन कब्जे में ली गई। हालांकि यह प्रक्रिया याचिकाकर्ता की सहमति और उचित मुआवजे के बिना पूरी की गई, जो अदालत की नजर में अवैध पाया गया।
हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान कहा कि जमीन पर कब्जा मनमाने ढंग से और बिना किसी विधिक प्रक्रिया के किया गया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि नगर पालिका तीन दिनों के भीतर जमीन से दुकानें हटाए। याचिकाकर्ता को जमीन के उपयोग के लिए बाजार भाव के अनुसार मुआवजा प्रदान किया जाए। और याचिकाकर्ता को नगर पालिका परिषद से ₹25,000 की लागत वसूलने की अनुमति दी गई। इसके साथ ही मुख्य नगरपालिका अधिकारी को निर्देश दिया गया कि यह जांच करें कि किस अधिकारी के आदेश पर यह कार्रवाई की गई और दोषी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य
हाईकोर्ट के आदेश ने स्पष्ट किया कि किसी भी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भूमि अधिग्रहण करते समय विधिवत प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। इस मामले में, बिना सहमति और मुआवजे के निजी भूमि पर कब्जा करना संविधान और कानून के खिलाफ है।