जबलपुर जिले में एक बार फिर गेहूं खरीदी में बड़ा घोटाला सामने आया है। बरेला और सिहोरा थाना क्षेत्र में खाद्य अधिकारियों की शिकायत पर खरीदी केंद्र प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। दोनों स्थानों पर करीब एक करोड़ रुपये के गेहूं की हेराफेरी का मामला सामने आया है।
बरेला: 53 लाख से अधिक का गेहूं गायब
बरेला पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, खाद्य विभाग की ओर से की गई शिकायत में बताया गया कि श्री शक्ति संकुल स्तरीय संगठन, पिपरिया द्वारा संचालित गेहूं, जिसे पटपरा स्थित शिवांशी वेयरहाउस में रखा गया था, वहां 53 लाख 34 हजार 940 रुपये कीमत का 2051.90 क्विंटल गेहूं कम पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि यह गेहूं खरीदा ही नहीं गया था, फिर भी शासन से राशि प्राप्त कर ली गई।
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4104 बोरियां कम मिलीं
कलेक्टर द्वारा गठित जांच टीम को जांच के दौरान 243 किसानों का डाटा मिला, जिनसे कुल 31410.40 क्विंटल गेहूं की खरीदी हुई थी। वहीं, संस्था द्वारा पोर्टल पर 62820 बोरियों की खरीदी दर्ज की गई, जबकि गोदाम में गिनती करने पर केवल 58717 बोरियां ही मिलीं- यानी 4104 बोरियां कम पाई गईं। इस मामले में श्री शक्ति संकुल की प्रबंधक व खरीदी केंद्र प्रभारी शिववती आर्मो, कंप्यूटर ऑपरेटर देवी साहू, और ग्राउंड सर्वेयर आकाश ठाकुर सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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मझौली: 42 लाख से अधिक की हेराफेरी
इसी तरह मझौली के ग्राम लटुआ रीछी स्थित उपार्जन स्थल 'अन्नपूर्णा आदित्य ग्रेडिंग एंड वेयरहाउस' की जांच में यह तथ्य सामने आया कि वहां 328 किसानों से समर्थन मूल्य पर 31288 क्विंटल गेहूं की खरीदी दर्ज थी, जबकि मौके पर केवल 19040 क्विंटल गेहूं ही मिला। यहां 1623 क्विंटल गेहूं, जिसकी कीमत 42 लाख 19 हजार 800 रुपये आंकी गई है, कम पाया गया। जांच में सामने आया कि समिति प्रबंधक व खरीदी केंद्र प्रभारी सूरज सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर अंकुश पटेल और ग्राउंड सर्वेयर हर्षित कुर्मी ने आपसी सांठगांठ कर बिना वास्तविक खरीदी के ई-उपार्जन पोर्टल पर फर्जी प्रविष्टियां कीं।
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पुलिस ने दर्ज किए केस
खाद्य विभाग की रिपोर्ट और जांच प्रतिवेदन के आधार पर पुलिस ने दोनों मामलों में आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उन्हें विवेचना में लिया है। जांच जारी है और मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।