मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने आयुध निर्माणी फैक्ट्री (ओएफके) जबलपुर पर हमले की साजिश के आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि धर्म आधारित आतंकवाद दूसरे धर्मों के प्रति घृणास्पद विचारों से उत्पन्न होता है। ऐसे व्यक्ति के प्रति उदारता नहीं दिखाई जा सकती, जो आतंकवाद और अवैधानिक गतिविधियों के गंभीर आरोप का सामना कर रहा हो।
जबलपुर निवासी सैयद मामूर अली की तरफ से दायर जमानत याचिका में कहा गया था कि एनआईए ने उसे 26 मई 2023 को गिरफ्तार किया था। वह लगभग डेढ़ साल से न्यायिक अभिरक्षा में है। पूर्व में भोपाल स्थित एनआईए विशेष कोर्ट के द्वारा उसकी जमानत याचिका निरस्त कर दी गयी थी, जिसके कारण हाईकोर्ट की शरण ली गयी है। पूर्व में याचिकाकर्ता के खिलाफ पूर्व में कोई गंभीर आपराधिक प्रकरण नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रदेश शासन की ओर से जमानत आवेदन का विरोध किया गया। सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि आरोपी को एनआईए दिल्ली की टीम ने 26 मई 2023 को गिरफ्तार किया था। उसके विरुद्ध ओएफके पर हमला करने की साजिश और उसके लिए हथियार तैयार करने का गंभीर आरोप लगा है। इसलिए भारतीय दंड विधान और गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम 1967 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
याचिकाकर्ता धार्मिक उपदेशक जाकिर नाइक से प्रभावित है। कोरोना काल के दौरान याचिकाकर्ता व उनके साथी जाकिर नायक का वीडियो देखकर धर्म की तुलना का ज्ञान प्राप्त करते थे। इससे पूर्व भोपाल स्थित एनआईए की विशेष कोर्ट भोपाल ने 12 अप्रैल 2024 को आरोपी की जमानत अर्जी निरस्त कर चुकी है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ जमानत याचिका को खारिज कर दिया।