मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बीपीएल कार्ड में हेराफेरी का मामला पकड़ा है। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अलहुवालिया की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अनावेदक महिला द्वारा पेश किए गए बीपीएल कार्ड मनगढ़ंत व हेराफेरी कर बनाया गया है। एकलपीठ ने अनावेदक महिला के अधिवक्ता के आग्रह पर एफआईआर दर्ज नहीं करते हुए दस हजार की कॉस्ट लगाकर अतिरिक्त आयुक्त के आदेश को खारिज कर दिया।
बता दें कि याचिकाकर्ता संध्या मरावी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसने डिंडौरी में समनापुर आंगनवाड़ी केन्द्र में सहायिका पद के लिए आवेदन किया था। उसे मैरिट में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था और अनावेदक रोशनी टेकाम को नियुक्ति प्रदान कर दी गई थी। अनावेदक महिला को बीपीएल कार्ड के दस अंक प्रदान किए गए थे। बीपीएल कार्ड में अनावेदक महिला का नाम उसकी सास के साथ जुड़ा हुआ था। इसके खिलाफ उसने कलेक्टर डिंडौरी के समक्ष अपील दायर की थी। कलेक्टर ने अनावेदक महिला की नियुक्ति निरस्त करते हुए उसके पक्ष में आदेश जारी किया था।
अनावेदक महिला ने उक्त आदेश को अतिरिक्त आयुक्त जबलपुर के समक्ष चुनौती दी थी। अतिरिक्त आयुक्त ने कलेक्टर के आदेश को निरस्त करते हुए अनावेदक महिला की नियुक्ति को सही ठहराया था। इसे चुनौती देते हुए उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने नियुक्ति संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए थे। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अनावेदक महिला का विवाह साल 2016 में हुआ था और सास के बीपीएल कार्ड में उसका नाम शादी से पहले जुड़ गया था। इसके अलावा अनावेदक महिला के ससुस सहायक प्रध्यापक के पद पर पदस्थ थे। उनकी मौत के बाद जेठ को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।
एकलपीठ ने अनावेदक महिला के खिलाफ क्यों एफआईआर दर्ज नहीं करवाने के संबंध में उसके अधिवक्ता से स्पष्टीकरण मांगा था। महिला के कारण एफआईआर दर्ज नहीं करवाते हुए कॉस्ट लगाकर याचिका खारिज करने का आग्रह किया गया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए दस हजार की कॉस्ट लगाकर अतिरिक्त आयुक्त के आदेश को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सुदीप सिंह सैनी ने पैरवी की।