महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पुरानी गाइड लाइन की शर्तों के अनुसार टेंडर जारी किए थे। सरकार द्वारा जारी नई गाइड लाइन का पालन टेंडर में अपनाए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता महिला स्वयं सहायता समूह को 25 हजार रुपये प्रदान करने के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं।
बता दें कि मां जानकी स्वयं सहायता समूह की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि मार्च 2021 में सागर जिले में पूरक पोषण आहार की सप्लाई के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विज्ञापन जारी किए गए थे। विज्ञापन में निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार शर्तें निर्धारित की गई थीं। याचिका समूह ने भी टेंडर के लिए आवेदन किया था। टेंडर प्रक्रिया के दौरान सरकार द्वारा नई गाइड लाइन निर्धारित कर दी गई थी।
याचिका में कहा गया कि टेंडर में नई गाइड लाइन की शर्तें लागू कर दी गईं। शर्तों में संशोधन के संबंध में संशोधित विज्ञापन का भी प्रकाशन नहीं किया गया। याचिका पर पूर्व में सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिका के खर्च के रूप में राज्य सरकार याचिकाकर्ता को 25 हजार रुपये 30 दिनों में प्रदान करे। यह राशि राज्य सरकार दोषी अधिकारियों से वसूल सकती है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता धर्मेन्द्र सोनी ने पैरवी की।