मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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तीन बार पीएससी का प्री एग्जाम से लेकर इंटरव्यू क्लीयर करने के बावजूद भी नौकरी नहीं मिलने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि वह ओबीसी वर्ग का अभ्यर्थी था और तीनों बार बताया गया कि उसका सिलेक्शन ओबीसी वर्ग के लिए अपहोल्ड किए गए रिजल्ट हुआ है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने एमपीपीएससी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
नरसिंहपुर निवासी शक्ति राय की तरफ से याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि साल 2020, 2022 तथा 2023 में एमपीपीएससी परीक्षा के प्री एग्जाम, मैन एग्जाम तथा इंटरव्यू में सिलेक्शन हुआ था। इंटरव्यू में बाद उसे सूचित किया गया कि उसका चयन 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण सूची में हुआ है। उसकी रैंकिंग 14 से 27 प्रतिशत के बीच है, इसलिए उसका रिजल्ट अपहोल्ड किया गया है। ओबीसी वर्ग के 14 प्रतिशत आरक्षित अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई है।
याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के संबंध में नोटिफिकेशन प्रकाशित किया गया था। इसे चुनौती देते हुए साल 2019 में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए कई मामलों में ओबीसी वर्ग को सिर्फ 14 प्रतिशत आरक्षण देने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद पीएससी ने 87:13 प्रतिशत का फार्मूला लागू कर रिजल्ट की घोषणा की थी। याचिका में कहा गया था कि अपहोल्ड रिजल्ट तथा प्राप्त अंक के संबंध में उसे किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गई है। तीन बार पीएससी क्लियर करने के बावजूद भी रिजल्ट अपहोल्ड होने के कारण उसे नौकरी प्राप्त नहीं हुई है। इसके कारण उसका भविष्य अधर में लटक गया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।